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विनोद ने गाय की सेवा के लिए खोल दी गोशाला

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बिजनौर में बैराज के पास गौशाला में गौवंश की सेवा करती विनोद चौधरी। - फोटो : BIJNOR
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विनोद ने गाय की सेवा के लिए खोल दी गोशाला
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बिजनौर। बचपन से गाय की सेवा से जुड़ी विनोद चौधरी ने गोमाता की सेवा के लिए गोशाला ही खोल दी। दो गाय से शुरू हुई उनकी गोशाला में आज 300 गाय हैं। वे बूढ़ी गाय की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानती हैं। उनके इस अभियान से शहर के काफी प्रतिष्ठित परिवार भी जुड़े हुए हैं। अब वे बूढ़ी गाय के गोबर से दीपक, गोकाष्ट बनाकर गोशाला की आय भी बढ़ा रही हैं।
विनोद चौधरी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही गाय की सेवा करने की लगन थी। उन्होंने अपने पति से परामर्श करके गोशाला खोलने पर विचार किया। वे बैराज रोड पर एक साधु के आश्रम में पहुंचीं और गाय की सेवा के लिए सहयोग मांगा। साधु ने उन्हें आश्रम की जमीन में गाय रखने की अनुमति दे दी। फिर विनोद चौधरी ने गांवों में जाकर गांव वालों को बूढ़ी गाय को बेचने के बजाए सेवा के लिए उन्हें देने को कहा। गांव वालों ने भी उन्हें गाय देनी शुरू कर दीं। शुरूआत दो गाय से हुई। साल 2008 में पुलिस ने गोतस्करों के पास से 60 गाय पकड़ीं तो उन्हें गोशाला में छोड़ा। पुलिस की सलाह पर उन्होंने समिति के नाम पर गोशाला के लिए जमीन खरीदी। आज विनोद चौधरी की गोशाला में 300 से ज्यादा गाय हैं। वे रोज खुद गोशाला जाकर गोवंश की सेवा करती हैं। उन्होंने काफी परिवारों को गोशाला की सेवा से जोड़ा है।
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बढ़ा रहीं गोशाला की आमदनी
विनोद चौधरी बूढ़ी व बीमार गायों से भी गोशाला की आमदनी बढ़ा रही हैं। वे गोवंश के गोबर से गोकाष्ट व दीये बना रही हैं। माना जाता है कि देशी गोवंश के गोबर से बने दीपक में कपूर जलाने से गृह दोष खत्म होते हैं। वे गोबर के दीये बना रही हैं। साथ ही गोकाष्ट का निर्माण भी कर रही हैं। विनोद चौधरी का कहना है कि गायत्री, गंगा और गाय भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं। इनके बिना हमारी संस्कृृति अधूरी है। उनका कहना है कि युवा वर्ग को गोसेवा से जुड़ना चाहिए और अपनी संस्कृति को बचाना चाहिए।
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