अस्थायी पुल बनाने से ग्रामीणों ने खड़े किए हाथ
शेरकोट/धामपुुर। नंदगांव, नयागांव, नाथाडोई गांव के लोगों ने गांव नयागांव में खो नदी पर कांवड़ियों के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल बनाने में असमर्थता जताते हुए प्रशासन को इसका जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण इस बार पुल निर्माण नहीं हो पाएगा। पुल का निर्माण करने में लाखों की लागत आती है। इस पुल के निर्माण होने से कांवड़ियों का नगीना से शेरकोट आने तक का करीब 20 किमी लंबा मार्ग कम हो जाता है।
क्षेत्र के गांव नंदगांव नयागांव, नाथाडोई, करनाला आदि गांवों के रामवीर सिंह, धर्मवीर सिंह, महेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, डा. घासीराम, ड. राजेंद्र, प्रधान हरज्ञान सिंह का कहना है कि महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर शिवभक्त गुजरते हैं। नयागांव में पिछले 15 सालों से श्रमदान कर खो नदी पर अस्थायी तौर पर लकड़ी के पुल निर्माण शुरू किया जाता है, पर इस बार अभी तक इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि वह इस पुल का निर्माण कराने की मांग को लेकर कई बार तहसीलदार चंद्रकांता, एसडीएम धीरेंद्र सिंह, डीएम रमाकांत पांडेय से मिले। अधिकारियों के भरोसे के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि उनके द्वारा खो नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल का निर्माण करने से नगीना से शेरकोट को आने वाले शिवभक्तों की डगर आसान हो जाती है। यदि शिवभक्त नगीना से हाईवे 74 से होते हुए शेरकोट आते हैं तो उनको यहां तक आने में करीब 30 किमी लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यदि शेरकोट में नयागांव में खो नदी पर लकड़ी के अस्थायी पुल का निर्माण कर दिया जाता है तो 30 किमी के सापेक्ष यह यात्रा करीब 12 किमी ही रह जाती है। विडंबना है कि ग्रामीण इस बार इस पुल का निर्माण करने में असमर्थ हैं। उनके पास संसाधनों का टोटा है। इस पुल का निर्माण करने और महाशिवरात्रि पर्व के संपन्न हो जाने के बाद पुल का वहां से हटाने में करीब 15 दिन लगते हैं। इन 15 दिनों तक काम करने में तीन सौ रुपये प्रतिदिन के 15 मजदूरों को लगाया जाता है। इसके अलावा गांव के लोग ट्रैक्टरों ट्रालियों से अपने स्तर से अलग श्रमदान करते हैं। ग्रामीणों ने डीएम से पुल का अस्थाई निर्माण कराने में सहयोग की मांग की है।
जांच कर समस्या का निदान कराएंगे: एसडीएम
एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसा मामला ग्रामीणों की ओर से संज्ञान में नहीं लाया गया है। वह जांच कराकर समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे।