बिजनौर। गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों ने अपनी कारीगरी से न केवल रोजगार के अवसर तलाशे हैं, बल्कि गंगा को भी इन ग्रामीणों के रूप में प्रहरी मिल गए हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने बिजनौर गंगा बैराज पर जलज विहारिणी बिक्री केंद्र खोला है। इस पर ग्रामीणों द्वारा बनाए उत्पाद की बिक्री की जाएगी। इसके साथ ही गंगा और उसमें रहने वाले जीवों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है। जिन ग्रामीणों के उत्पाद की बिक्री यहां की जा रही है, उन्हें गंगा प्रहरी द्वारा बनाया जा रहा है।
गंगा में जैव विविधता बचाने के लिए मछली के शिकार रोकने के लिए तमाम सख्ती हुई, लेकिन सवाल उठा कि गंगा किनारे के लोग यह न करें तो घर का खर्चा कैसे चलेगा। ऐसे में भारतीय वन्य जीव संस्थान की पहल ने गंगा की जैव विविधता की सुरक्षा और ग्रामीणों को रोजगार दोनों एक साथ उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ा दी है। पहले चरण में ग्रामीणों को मूंझ से डलिया, फ्लावर पॉट समेत कई उत्पाद, कई तरह का अचार, लड्डू, कपड़े के बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया। ग्रामीणों के इन उत्पादों को बेचने के लिए गंगा बैराज बिजनौर पर जलज विहारिणी बिक्री केंद्र बना दिया गया है। इस केंद्र में उत्पाद की बिक्री के साथ-साथ गंगा से जुड़ा साहित्य, गंगा में रहने वाले जलीय जीव, पक्षियों के बारे में भी समस्त जानकारी यहां आने वाले लोगों को मिलेगी।
ग्रामीणों को मिलेगा पूरा शेयर, कर्मचारियों को वेतन देगा डब्ल्यूआईआई
बिक्री केंद्र पर दो कर्मचारियों की तैनाती की गई है। यह भी गंगा प्रहरी ही थे, जिन्हें इन उत्पादों को बेचने की जिम्मेदारी दी गई है। इनका मानदेय या वेतन डब्ल्यूआईआई से दिया जाएगा। यहां पर ग्रामीणों के बने जो उत्पाद बिकेंगे, उसका पूरा शेयर ग्रामीणों को मिलेगा। इससे उन्हें अधिक लाभ भी होगा।
बिजनौर से बंगाल तक के उत्पाद मौजूद : अनु सैनी
डब्ल्यूआईआई से प्रोजेक्ट एसोसिएट अनु सैनी ने बताया कि इस केंद्र पर बिजनौर, मुजफ्फरनगर समेत बंगाल तक में तैयार हो रहे उत्पाद मौजूद हैं। कटिया मुजफ्फरपुर से खाद्य उत्पाद जैसे अचार, कैंडी, हेमराज कॉलोनी से कांस मूंझ से बने डलिया, फ्लोवर पॉट, बैग, दुपट्टा, विदुरकुटी से मूंझ के डलिया, रावली से कांस मूंझ के डलिया, गंगा किनारे उत्तराखंड के गांवों से शहद, बेस्ट बंगाल से साड़ी, ज्वेलरी, बिहार से जूट बैग, बनारस से बनारसी बैग यहां बेचे जा रहे हैं। 13 जनवरी को इसका उद्घाटन होगा।