संवाद न्यूज एजेंसी बिजनौर/गजरौला शिव। गढ़ी बगीची के गांव वाले मालदेवता मंदिर में संतों के मंदिर पर रहने के विरोध में हैं। इसी विवाद के बीच महंत सुरेशानंद सरस्वती की ओर से ग्राम प्रधान समेत आठ लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
शहर कोतवाली में तीन सितंबर को दर्ज कराई रिपोर्ट में महंत सुरेशानंद सरस्वती ने कहा कि वे अपने शिष्यों के साथ माल देवता गढ़ी बगीची आश्रम में रहते हैं। कहा कि 23 अगस्त को वे हरिद्वार गए तो शाम के समय उनके शिष्य तपस्या नंद सरस्वती, योगानंद सरस्वती, शिवनारायण, सूरज आश्रम में मौजूद थे।
इसी दौरान दो गाड़ियों में आए सोमदेव, संदीप उर्फ मुखिया, नरदेव, जोगा, सुमित, चमन, सहदेव, आशीष और दो अज्ञात लोगों ने सभी साधुओं के मोबाइल छीन लिए और मारपीट करते हुए जबरन हाथ-पैर बांधकर गाड़ियों में डाल लिया। उन्हें हरिद्वार के रास्ते भागूवाला के जंगलों में फेंक दिया। इस केस में विवेचना चल रही है।
n तीन माह पहले मठ से साधुओं को भगा दिया गया था
गढ़ी बगीची के जंगल में बना मालदेवता मठ और जिंघाला गोत्र के कुल देवता का विवाद गहराता जा रहा है। मठ में रह रहे साधु-संतों को कुछ लोगों ने कब्जा करने का आरोप लगाते हुए तीन महीने पहले भगा दिया था। मंगलवार को कलक्ट्रेट में संतों के पहुंचने की खबर गढ़ी बगीची और स्वाहेड़ी के गामीणों को मिली। वे भी ग्राम प्रधान सोमदेव के नेतृत्व में मालदेवता मठ पर इकट्ठा हो गए।
प्रधान सोमदेव ने कहा कि मठ जिंघाला गोत्र के कुल देवता हैं। मठ पर एक वर्ष में दो बार जिंघाला गोत्र की ओर से मुंडन संस्कार किया जाता है। मठ पर रह रहे साधु-संतों पर कब्जा करने का आरोप लगाया। कहा कि किसी भी सूरत में कब्जा करने वाले साधु-संतों को मठ पर नहीं रहने दिया जाएगा। मठ की संपत्ति ग्राम पंचायत की संपत्ति है। ग्राम पंचायत की संपत्ति की सुरक्षा का अधिकार ग्राम सभा को है। े