श्रीराम मंदिर निर्माण में प्रयोग होगी विदुर कुटी की मिट्टी
गंज दारानगर (बिजनौर)। श्रीराम मंदिर निर्माण में महाराजा भरत की जन्मस्थली, महात्मा विदुर और कृष्ण के पावन चरण को छूने वाली मिट्टी भी प्रयोग में आएगी। बिजनौर से विदुर कुटी की मिट्टी की पूजन करके उसे अयोध्या भेजा जा रहा है। यहां से गंगाजल भी अयोध्या भेजा जा रहा है।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण आंदोलन में प्रमुख भूमकिा निभाने वाला जिला अब मंदिर के भवन में एकदम प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेने जा रहा है। चक्रवर्ती महाराजा भरत का जन्म बिजनौर की धरती पर ही हुआ था। उन्हें के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा है। महाभारत के युद्ध के समय महात्मा विदुर ने राजमहल को त्यागकर बिजनौर में गंगा किनारे अपना आश्रम बनाया था। श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के भोग को त्यागकर महाराज विदुर की कुटी में बथुए का साग खाया था। श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल विदुर कुटी अब अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में अपना योगदान देगी। विदुर कुटी के सामने की पावन मिट्टी और गंगाजल को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए भेजा जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को विदुर कुटी में गंगा किनारे मिट्टी को यज्ञ, पूजन आदि साधु-संतों व पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच और पवित्र किया गया। इस मिट्टी व गंगाजल को पांच अगस्त को अयोध्या में भेजा जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि भारतवर्ष के अन्य भागों की तरह विदुर कुटी से मिट्टी जा रही है। यह जिले के लिए गर्व का विषय है। वही, मृदा पूजन कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह, जिला महामंत्री कैलाश सिंह, विभाग प्रचारक प्रशांत महर्षि, जिला कार्यवाहक सुनील कुमार, विभाग प्रचार प्रमुख मयंक मयूर, विभाग मंत्री जितेंद्र सिंह, विदुर कुटी प्रखंड मंत्री आदित्य तोमर, स्वामी गोपाल दास महाराज जी, निरंजन दास महाराज जी, ललित कुमार, विभाग प्रचारक रोहित कुमार, ग्राम प्रधान पति अमर सिंह राठौर, जॉनी सैनी, गौरव जोशी, मलखान सिंह आदि मौजूद रहे।
जिले की पहचान महाराजा भरत और महाराज विदुर से
जिले की पहचान महाराजा भरत व महाराज विदुर से ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बिजनौर में अपनी सभा करते हुए महात्मा विदुर की धरती को नमन करते हैं। विदुर कुटी को देश के प्रमुख स्थानों में भी शामिल किया गया है। इसे पर्यटन व तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने के भी बहुत प्रयास किए जा रहे हैं।