बिजनौर। जिले के उद्यमियों ने उद्योगों में ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रयोग बंद कर दिया है। कोरोना संक्रमित मरीजों और प्रशासन के सहयोग के लिए इन सिलिंडर को रिजर्व किया जा रहा है। उद्योगों में जरूरत होने पर बिजली की मशीनों से वैल्डिंग की जा रही है। जिले में हर महीने पांच से छह हजार ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रयोग होता है। इनका प्रयोग बंद कर मरीजों को जरूरत पड़ने पर प्रशासन को ये सिलिंडर दिए जाएंगे।
जिले में छोटे बड़े पांच हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, जहां ऑक्सीजन सिलिंडरों का भी इस्तेमाल होता है। ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रयोग आमतौर पर वैल्डिंग आदि कार्य के लिए होता है। जिले के अलावा आसपास के जिलों में ऑक्सीजन का कोई प्लांट नहीं है। दक्षिण भारत से ऑक्सीजन सिलिंडर यहां आते हैं। इस समय कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जिले में कोरोना मरीजों की तादाद रोज सैकड़ों में आ रही है। बाकी जगह भी यही हाल है। गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडरों की कमी पड़ रही है। इसे देखते हुए शासन ने गाइड लाइन जारी कर औद्योगिक इकाइयों में ऑक्सीजन सिलिंडरों के प्रयोग पर रोक लगा दी थी।
स्थिति को देखते हुए जिले के उद्यमी शासन की इस गाइडलाइन का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रयोग उद्योगों में बंद कर दिया गया है। जिले में हर महीने उद्योगों में डेढ़ से पांच से छह हजार ऑक्सीजन सिलिंडर खर्च होते हैं। जिस औद्योगिक इकाई के पास जितने भी सिलिंडर हैं उन्हें रिजर्व किया जा रहा है। उद्योगों में ऑक्सीजन सिलिंडर के बजाए दूसरों विकल्पों का प्रयोग किया जा रहा है।
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ऑक्सीजन सिलिंडर से बच जाती है जान
एक ऑक्सीजन सिलिंडर में छह से आठ किलो तक ऑक्सीजन आती है। अगर किसी मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है और जरूरत के हिसाब से उसके शरीर में 50 प्रतिशत ऑक्सीजन ही जा पा रही है तो एक सिलिंडर तीन से चार घंटे ऐसे मरीज की ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा कर सकता है।
उद्यमी करेंगे सहयोग
उद्यमी कुलदीप जैन, सौरभ माथुर और मनी खन्ना के अनुसार उद्योगों में ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रयोग बंद करा दिया गया है। उद्यमी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह शासन-प्रशासन के साथ हैं। जनता भी बिना काम के घर के बाहर न निकले और कोरोना गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करें।