बिजनौर। रबी सीजन की फसलों की बुवाई का समय शुरू हो गया है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वह मृदा का परीक्षण कराएं। उसी के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें। विभाग का दावा है कि जनपद में फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में फास्फेटिक उर्वरक उपलब्धता है।
रबी फसलों की बुवाई में जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि की सेहत खराब हो रही है। रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग करने से जमीन की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि फसलों की बुवाई के लिए आवश्यकतानुसार संतुलित नाइट्रोजन, फास्फेटिक एवं पोटेशिक उर्वरकों का प्रयोग करें।
डीएपी एवं यूरिया के स्थान पर नैनो डीएपी/यूरिया, कल्चर, एसएसपी, बायो पोटाश आदि एवं अन्य घुलनशील उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि मृदा में जीवाश्म कार्बन बढ़ाने के लिए हरि खाद एवं तिलहन तथा दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा दें। साथ ही सभी किसान फसल चक्र अपनाएं। हरि खाद, फसल चक्र अपनाने से जमीन पर उर्वरकों का अधिक प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसलिए किसान फसल की बुवाई व उत्पादन के लिए फसल में रासायनिक उर्वरकों का संतुलित रूप से ही प्रयोग करें।