Bijnor News: शेरकोट के मोहल्ला खुराड़ा निवासी फरजंद अंसारी ने 109 रैंक हासिल की है। उनके परिवार के हालात बेहद कठिन हैं। वहीं उदित कुमार निवासी गांव ठाठजट और नूरपुर निवासी रीता ने भी कामयाबी का परचम लहराया है।
मुंबई में रहकर साइकिलों के पंक्चर बनाने वाले शेरकोट के मोहल्ला खुराड़ा निवासी शाकिर अंसारी के फरजंद (बेटा) फरजंद अंसारी ने यूपी पीसीएस परीक्षा पास की है। परिवार के कठिन हालात भी उनके मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं पाए। उन्होंने 109 रैंक हासिल की है।
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माता शमशीदा अंसारी ने बताया कि उन्होंने कभी औपचारिक स्कूली शिक्षा ग्रहण नहीं की। इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया। हर परिस्थिति में उसका हौसला बढ़ाया। फरजंद ने कक्षा 10 तक की पढ़ाई ऑल सेंट स्कूल शेरकोट से की। कक्षा 12 की शिक्षा एमकेडी इंटर कॉलेज धामपुर से पूरी की।
उन्होंने बड़े सपनों को साकार करने के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया मुंबई से कोचिंग ली। फिर लखनऊ, वर्तमान में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रहकर पढ़ाई की। आखिरकार यूपी पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल की। फरजंद अंसारी अपनी तीन बहनों सना परवीन, सानिया और असबा अंसारी से बड़े हैं। फरजंद की उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
उदित ने पाई 105 रैंक, आईएएस बनना लक्ष्य
उदित कुमार पुत्र मास्टर गजेंद्र कुमार निवासी ग्राम ठाठजट ने भी यूपी पीसीएस परीक्षा में 105वीं रैंक प्राप्त की है। उदित कुमार का चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण क्षेत्र के गांव बुढ़नपुर में हुई। इंटर सेंट मेरी नूरपुर से प्रथम श्रेणी से पास की। स्नातक दिल्ली यूनिवर्सिटी हिंदू कॉलेज केमिस्ट्री ऑनर्स से और परास्नातक जलवायु विज्ञान दिल्ली से तथा डीआरडीओ और आईएसआरओ में भी शोध कार्य किया। उदित दो भाइयों में बड़े हैं। छोटे भाई तीरंदाजी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। दादाजी मास्टर तेजपाल सिंह सेवानिवृत शिक्षक रहे हैं। उदित का सपना आईएएस बनना है। उन्होंने सफलता का श्रेय समस्त परिजनों और गुरुओं को दिया है। उनके परिवार, संबंधियों तथा ग्रामवासियों में हर्ष का माहौल है।
रीता ने सरकारी स्कूल से पढ़कर पूरा किया अफसर तक का सफर
नूरपुर क्षेत्र के गांव मंगोलपुरा निवासी तुकमान सिंह की पुत्री रीता ने यूपी पीसीएस की परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल की है। उन्हें वाणिज्य कर अधिकारी का पद मिला है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
रीता ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और कठिन परिश्रम को दिया। उन्होंने बताया कि निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से ही यह सफलता संभव हो सकी। परिजनों के अनुसार रीता की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नूरपुर से प्राप्त की तथा स्नातक की पढ़ाई दरबाड़ा स्थित एक निजी महाविद्यालय से पूरी की। स्नातक के बाद वह गाजियाबाद रहकर ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा की तैयारी कर रही थीं और चौथे प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली। रीता सामान्य किसान परिवार से संबंध रखती हैं। उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करना था, जो अब साकार होने जा रहा है।