संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद (बिजनौर)। जोगीरम्पुरी दरगाह पहुंचे शिया उलमाओं ने मौला-ए-कायनात की जिंदगी से सबक लेेने को कहा। उन्होंने शिक्षा, सद्भाव, अमनो अमान कायम रखने और इस्लाम के बताए रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। .
दीने इस्लाम सलामती का मजहब है। हुक्म है कि कलाम से पहले सलाम करो। इस्लाम का पैगाम है कि जियो और जीने दो, इसलिए सलाम के मारफत सलामती की दुआएं कीं जाती हैं। - मौलाना तंजीम हुसैन जैदी, सेंथल बरेली
दुनिया में इत्तेहाद की जरूरत है। इस्लाम ने हमेशा प्यार मोहब्बत और दोस्ती का पैगाम दिया है। जो मुल्क आपसी दुश्मनी रखते हैं, उन्हें न तो इस्लाम की परवाह है और न ही इत्तेहाद की। - मौलाना हामिद हुसैन, हुसैनपुरी
इल्म से जिंदगी संवरती है। कहा भी गया है इल्म बांटने से बढ़ता है। शिक्षित इंसान संजीदा होता है और जिंदगी के हर मुकाम अपना लोहा मनवाता है। इल्म के जरिए ही चांद तक का सफर तय होता है। - मौलाना इरफान हैदर, छौलस
मजलूम से मोहब्बत और जालिम से नफरत की जाती है। दुनिया गवाह है अदल और इंसाफ पर आधारित हुकूमतें चलती हैं। हजरत अली ने अपनी हुकूमत और किरदार से इस बात को साबित कर दिखाया है। - मौलाना रजा हुसैन रिजवी, अध्यक्ष ऑल इंडिया शिया चांद कमेटी, लखनऊ
दुनिया में अमनों अमान कायम रखने के लिए मौला-ए-कायनात की जिंदगी को समझना होगा। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की परवाह नहीं की। उन्होंने दीन और इस्लाम की हिफाजत के लिए जुल्म और सितम को खत्म करने के लिए साथियों के साथ कुर्बानी दी। - मौलाना सैय्यद तसनीम मेहदी, लखनऊ