राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर विशेष
- अंधविश्वास के चक्कर में जान गवां रहे लोग
- मस्तिष्क में अनचाहा करंट दौड़ने से पड़ता है दौरा
- 30 मरीज मिर्गी के मेडिकल अस्पताल में हर महीने पहुंच रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। राष्ट्रीय मिर्गी दिवस आज मनाया जा रहा है। अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर लोग मिर्गी का इलाज नहीं कराते हैं। बल्कि नीम हकीम से झाड़-फूंक कराते हैं। सही समय पर इलाज नहीं होने पर लोग जिंदगी से भी जंग हार रहे हैं। मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में मिर्गी के हर महीने 30 मरीज तक पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज झाड़फूंक कराने के बाद चिकित्सक से इलाज कराने आए हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि मिर्गी को न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर भी कहा जाता है। शरीर में करंट लगने से ही हमारी मांसपेशियां कुछ हलचल करती हैं। आम तौर पर लोगों को जर्नलाइज्ड ट्री क्लोनिक सीजर नाम की मिर्गी पड़ती है। इसमें मस्तिष्क के किसी छोटे हिस्से में अनचाहा करंट दौड़ता है तो व्यक्ति को दौरा पड़ता है। जिसकी वजह से वह कहीं भी गिर सकता है।
लोगों में जागरुकता नहीं होने से कई बार मरीज की मौत भी जाती है। कैल्शियम, मैग्नीशियम, ब्लड शुगर की कमी से भी मिर्गी का दौरा पड़ता है। बिजनौर के मेडिकल अस्पताल में हर महीने मिर्गी के 30 मरीज तक पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में मिर्गी से संबंधित दवाइयां उपलब्ध हैं। फिर भी लोग इलाज नहीं कराते हैं।
मिर्गी होने के कारण
- सिर में चोट लगने के कारण
- दिमाग में कीड़े होने से
- मस्तिष्क में इंफेक्शन होने से
- दीमागी बुखार होने से
- सही नींद नहीं लेने से
मिर्गी के मरीज को होती है ये परेशानी
-मिर्गी के मरीज के सिर में तेज दर्द होती है, उसे बार-बार सिर पटकने को मन करता है।
-मिर्गी के मरीज को चक्कर आता है।
-मरीज को बार-बार उल्टी आती है।
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- कच्ची सब्जी, कच्ची सलाद नहीं खानी चाहिए
- सही पका हुआ खाना खाना चाहिए
- एक से अधिक बार दौरा पड़ने पर जांच कराएं
- अधिक समस्या होने पर चिकित्सक से तुरंत परामर्श लें
केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 40 वर्षीय व्यक्ति को मिर्गी की समस्या है। वह चलते-चलते 10 सेकेंड के लिए भ्रम की स्थिति में चला जाता है। वह कहीं भी रुक जाता है। 10 सेकेंड बाद मस्तिष्क में करंट कम होने से वह ठीक हो जाता है। यह समस्या उसे कई सालों से है।
केस नंबर दो
बिजनौर के एक गांव में एक ही परिवार की दो बहनें मिर्गी बीमारी से ग्रसित थी। उस क्षेत्र में मान्यता है कि जिसे दौरा पड़ता है, उसे ऊपरी असर है। दोनों बहनों को पिछले सालों से दौरा पड़ने की समस्या थी। अंधविश्वास के चक्कर में परिजनों ने उनका इलाज नहीं कराया। जिसके चलते कुछ समय पहले 15 वर्षीय लड़की की मौत हो गई। लड़की की मौत होने के बाद परिजन बड़ी बेटी को मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग लेकर आए। अब उसकी तबीयत में सुधार है।
केस नंबर तीन
बिजनौर के एक मोहल्ला निवासी 38 वर्षीय महिला को मिर्गी का दौरा पड़ता है। दौरा पड़ने की वजह से पति ने छोड़ दिया और बच्चे और अपने साथ ले गया। महिला अब अपने मायके में रहती है। मगर, मायके वाले उसका हाथ का कुछ नहीं खाते हैं। उसके खाने, रहने की व्यवस्था अलग कर दी है। परिजनों को लगता है कि यह बीमारी उन्हें भी हो जाएगा।
अगर किसी भी व्यक्ति को एक बार दौरा पड़ता है तो उसमें दवाई की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं बार-बार दौरा पड़ने पर मरीज का इलाज कराना चाहिए। कम से कम तीन साल और अधिकतम जीवनभर मरीज का इलाज चलता है। मस्तिष्क में अनचाहे करंट की वजह से मिर्गी का दौरा पड़ता है। - डॉ. नितिन कुमार, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल