कालागढ़ की नई कालोनी से रेस्क्यू किए गए इंडियन फ्लैप शैल कछुए।
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नदी में कछुए छोड़ने गई टीम को दिखा बाघ
कालागढ़ (बिजनौर)। कालागढ़ की नई कॉलोनी के आबादी क्षेत्र में आए दुर्लभ प्रजाति के दो कछुओं को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर रामगंगा नदी में छोड़ दिया। कछुओं को रामगंगा नदी में छोड़ने के दौरान पिचिंग की सीढ़ियों से उतर कर एक बाघ नदी तक पहुंच गया। किसी तरह रेस्क्यू टीम की जान बची।
कालागढ़ की नई कॉलोनी में अनेक वन्यजीव विचरण करते रहते हैं। यहां बाध, हाथी, बारहसिंगा, हिरन आदि दिखाई देना सामान्य जनजीवन है। ऐसे में ही यहां इंटर कॉलेज के निकट दो कछुए नजर आए। सामान्य से बड़े आकार के कछुए नजर आने पर इसकी सूचना पशु प्रेमी नई कालोनी निवासी संजय व रणवीर सिंह ने वन विभाग को दी, जिस पर कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज का त्वरित अनुक्रिया दल मौके पर पहुंचा। टीम ने कछुओं को कब्जे में ले लिया। दोनों ही कछुओं को रामगंगा नदी के तट पर लाया गया। टीम ने रामगंगा नदी में जाकर कछुओं को पानी में छोड़ दिया। इसी दौरान रामगंगा नदी के तटपर बनी सिंचाई विभाग की पिचिंग की सीढ़ियों से उतर कर एक बाघ नदी की ओर आता नजर आया। वन विभाग की टीम नदी से दूर हो गई। बाघ नदी के किनारे झाड़ियों में जाकर बैठ गया।
दुर्लभ प्रजाति के हैं कछुए
त्वरित अनुक्रिया दल के प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि इंडियन फ्लैप शैल टर्टल पानी के कछुए की एक बड़ी प्रजाति है जो इंसानी बस्ती में आ गए थे। मौके पर पहुंचकर इन्हें रेस्क्यू कर नदी में छोड़ा गया। यह कछुए पांच से दस किलोग्राम तक हो जाते हैं। अभी यह बच्चे ही हैं। इनकी संख्या कम हो जाने के कारण इन्हें दुर्लभ की श्रेणी में रखा गया है। रामगंगा नदी में इनका प्रजनन कराया जा रहा है। यहां इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। अक्सर तस्कर इनका शिकार औषधि व मांस के लिए करते हैं। यह जीव पर्यावरण को संरक्षित करने में विशेष योगदान देता है।