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कश्मीर से कन्या कुमारी तक होगा एक ही पाठ्यक्रम

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शुभा माहेश्वरी। - फोटो : BIJNOR
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कश्मीर से कन्या कुमारी तक होगा एक ही पाठ्यक्रम
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बिजनौर। करीब 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में बदलाव हुआ है। इस कदम को मैकाले शिक्षा व्यवस्था को समाप्त करके राष्ट्रीय शिक्षा की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है। नई शिक्षा नीति में एक राष्ट्र एक शिक्षा की झलक है। शिक्षाविदों की इसको लेकर अलग अलग राय है। कुछ का मानना है कि नई नीति शिक्षा में बदलाव एक क्रांतिकारी निर्णय है। जबकि कुछ का कहना है कि इससे बेरोजगारी और ज्यादा बढ़ेगी।
देश की शिक्षा नीति में बदलाव का लंबे समय से इंतजार था। इसे लेकर शिक्षक और छात्र संगठन लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे थे। माना जा रहा है कि मौजूदा शिक्षा नीति विदेशी शिक्षा के जोड़े गए हिस्से हैं। इससे युवाओं को प्रतिभा प्रदर्शन का पूरा मौका नहीं मिल रहा था। जिस कारण प्रतिभाओं का पलायन हो रहा था। नई नीति में बेसिक, माध्यमिक, डिग्री तथा तकनीकी स्तर की शिक्षा में व्यापक बदलाव किया गया है। किताबी रटाऊ की पारंपरिक नीति से हटकर शिक्षा को व्यवहारिकता की ओर ले जाने का सार्थक प्रयास है। समझा जा रहा है कि इससे अध्ययन तथा अध्यापन की प्रक्रिया मजबूत होगी। नई शिक्षा नीति अध्ययनशील छात्रों के लिए वरदान बनेगी। साथ ही शोधार्थियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। शिक्षाविदों की त्वरित प्रतिक्रिया में इसको लेकर अलग-अलग राय है।
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विश्वविद्यालयों का भेद खत्म होगा
साहु जैन पीजी कॉलेज की हिंदी की विभागाध्यक्ष शुभा माहेश्वरी कहती हैं कि नई शिक्षा नीति में देश की सभी यूनिवर्सिटी का सिलेबस समान किया जाना क्रांतिकारी कदम है। अब कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का छात्र एक ही कोर्स पढ़ेगा। अच्छी तथा कम अच्छी यूनिवर्सिटी का भेद खत्म होगा। सभी छात्रों की पढ़ाई का स्तर समान होगा। छात्रों के लिए विषय के विकल्प खुल गए हैं। छात्र को रुचि के अनुसार पढ़ने का मौका मिलेगा। नये शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। सेमेस्टर सिस्टम से छात्र की पढ़ाई में तारतम्यता रहेगी।
सैद्धांतिक शिक्षा व्यवहारिक शिक्षा में बदलेगी
गुरुनानक डिग्री कॉलेज स्योहारा के प्राचार्य डॉ. उदयवीर सिंह कहते हैं कि अब छात्र केवल रटने तक ही सीमित नहीं रहेंगे। उन्होंने जो पढ़ा है उसे व्यवहारिक रूप देने का मौका मिलेगा। नई शिक्षा नीति में सैद्धांतिक शिक्षा को व्यवहारिक शिक्षा में बदलने की व्यवस्था है। इससे छात्रों की पढ़ाई का स्तर सुधरेगा। पाठ्यक्रम समान होने से बच्चों का एक यूनिवर्सिटी छोड़कर दूसरी यूनिवर्सिटी में जाने का का मूवमेंट रुकेगा।
छात्र और शिक्षकों की दक्षता बढे़गी
विवेक कालेज बिजनौर के चेयरमैन अमित गोयल का कहना है कि नई शिक्षा नीति अध्ययन व अध्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने वाली है। छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार पढ़ने का मौका मिलेगा। नई शिक्षा नीति में शिक्षण संस्थाओं को स्वतंत्रता देने की बात है। यह अच्छा प्रयास है, शिक्षण संस्थाएं आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रम तैयार करके शिक्षण व शोध कार्य करा सकेंगे। साथ ही छात्र व शिक्षक की दक्षता बढ़ेगी।
एक होगा सभी विश्वविद्यालयों का सिलेबस
एसबीडी कॉलेज धामपुर की प्राचार्य पूनम चौहान का कहना है कि नई शिक्षा नीति में सभी विश्वविद्यालयों का सिलेबस समान करना समानता की सोच का द्योतक है। इससे बच्चों में अच्छी यूनिवर्सिटी होने की प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त होगी। छात्रों का आत्म विश्वास बढ़ेगा। सभी को स्तरीय किताब पढ़ने को मिलेंगी। शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
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नई नीति से बेरोजगारी को मिलेगा बढ़ावा
वर्धमान कॉलेज बिजनौर के प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार कहते हैं कि नई शिक्षा नीति में जीडीपी का अधिक पैसा शिक्षा पर खर्च करना अच्छी बात है। परंतु नई शिक्षा नीति निजीकरण को बढ़ावा देने की ओर अग्रसर है। शिक्षा की बहुउद्देशीय योजना के अच्छे परिणाम नहीं आए हैं। दिल्ली राज्य में इसका ट्रायल हो चुका है। वहां योजना को वापस लेना पड़ा था। एचईआई सिस्टम शक्ति विकेंद्रीकरण की नीति है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।

मुकेश कुमार।- फोटो : BIJNOR

उदयवीर सिंह।- फोटो : BIJNOR

पूनम चौहान।- फोटो : BIJNOR

अमित गोयल।- फोटो : BIJNOR

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