बिजनौर जनपद में कार्तिक मास की पूर्णिमा को विदुर कुटी के पास गंगा किनारे लगने वाले मेले की इस बार भव्यता में इजाफा होगा, सुविधाएं भी बढ़ जाएंगी। दरअसल गंगा स्नान मेले को राजकीय मेले का दर्जा देने की कवायद चल रही है। शासन ने इस मेले की कार्ययोजना पर विस्तार से रिपोर्ट मांगी है। सब कुछ ठीक रहा तो इस बार ही यह मेला राजकीय घोषित हो जाएगा।
प्रशासन और सरकार बिजनौर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलू को फलक पर लाने का प्रयास कर रही है। चाहे कण्व आश्रम हो या विदुर कुटी, इन्हें भी पर्यटन के नक्शे पर लाया जा रहा है। इसी क्रम में विदुर कुटी पर लगने वाले गंगा स्नान मेले पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
शासन ने गंगा स्नान मेले की कार्ययोजना पर विस्तार से रिपोर्ट मांगी है।
जिसके चलते जिला पंचायत की ओर से कार्ययोजना तैयार की जाने लगी है। जिला पंचायत कार्ययोजना में मेला आयोजन के तमाम बिन्दुओं को समाहित कर रही है। फिलहाल गंगा स्नान मेले का आयोजन जिला पंचायत की ओर से कराया जाता है।
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पिछले साल इस मेले के आयोजन पर करीब एक करोड़ रुपया खर्च हुआ था। अब अगर इस साल यह मेला राजकीय घोषित हो जाएगा तो सरकार से बजट भी मिलेगा। ऐसे में मेले में दी जा रही सुविधाओं में इजाफा होगा, साथ ही भव्यता भी बढ़ जाएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह भी सीएम योगी से मुलाकात कर मेले को राजकीय किए जाने का मुद्दा उठा चुके हैं।
महाभारत काल से जुड़ा है मेले का इतिहास
गंगा के तट पर लगने वाले इस मेले में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है। लोग परिवारों के संग मेले में पहुंचकर डेरा जमाकर दो से तीन दिन तक ठहरते हैं। परिवार में किसी की मौत होने जाने पर शोकाकुल परिवार के सदस्य मुख्य स्नान की पूर्व संध्या पर दीपदान कर उनकी आत्मशांति के लिए कामना करते हैं।
बताया जाता है कि यह परंपरा महाभारत काल से चल रही है। बताते हैं कि महाभारत के बाद हस्तिनापुर राज्य की तमाम विधवा औरतें विदुरकुटी के पास दारानगर गंज में आकर रहने लगी थीं।
गंगा स्नान मेले को राजकीय घोषित करने की तैयारी चल रही है। शासन की ओर से कार्य योजना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उम्मीद है कि इस बार यह मेला राजकीय हो जाएगा। जिससे मेले में सुविधाएं बढ़ेगी। - श्याम बहादुर शर्मा, एएमए जिला पंचायत