बिजनौर में अमर उजाला के अपराजिता के वेबिनार में भाग लेतीं महिलाएं।
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महिला अपराधों पर हो कठोर दंड का प्रावधान
बिजनौर। अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम अपराजिता के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में महिलाओं ने महिलाओं पर अपराध करने वाले अपराधियों के लिए कठोर दंड की मांग की। उन्होंने कहा कि कठोर दंड के प्रावधान के बाद ही अपराध पर अंकुश लगाया जा सकता है।
प्रसिद्ध महिला चिकित्सक डॉ. अलका विश्नोई ने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व वह मलयेशिया गई थीं, तब उनके टूर गाइड ने बताया था कि महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना है। यदि महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया तब तत्काल ही 25 कोड़े मारने का दंड दिया जाता है। भारत में भी इस प्रकार की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। महिला चिकित्सक डॉक्टर संगीता गर्ग ने कहा कि देर से मिला न्याय भी अन्याय के समान होता है। निर्भया कांड में यद्यपि चारों बलात्कारी हत्यारों को मृत्युदंड दंड दे दिया गया, लेकिन हत्यारों को दंड मिलने में आठ वर्ष लग गए। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीता सिंह ने कहा कि ऐसे व्यक्तियों के लिए जागरूकता की कमी भी एक हद तक जिम्मेदार है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कानून बनाने की आवश्यकता है, जिससे दुराचारियों में भय व्याप्त हो। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज झालू में रसायन विज्ञान की प्रवक्ता सुमित्रानंदनी का कहना है कि बच्चों को हम देवी पूजा के बारे में तो बताते हैं, लेकिन कई बार संस्कारों के अभाव में महिलाओं के लिए सम्मान भाव नहीं रखा जाता। आजकल सोशल मीडिया का गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। हमें पुरानी प्रथाएं और रूढ़िवादी सोच को छोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का प्रयास करना चाहिए।
डॉक्टर तंजीम आरिफ ने कहा कि बच्चों में बचपन से वसुधैव कुटुम्बकम के संस्कार डालने की आवश्यकता है। हमें एक शिक्षित वातावरण तैयार करने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें बच्चे अपनी मां, बहनों के साथ-साथ दूसरी महिलाओं का भी सम्मान करना सीखें। इससे एक विकसित सोच वाले देश का निर्माण होगा। गृहिणी रचना चौधरी ने कहा कि न्याय में देरी के कारण अनेक मामले सामने आ जाते हैं। कई बार पीड़िता को एक के बाद एक कई व्यभिचारों का सामना करना पड़ जाता है। पूर्व में कई ऐसे प्रकरण हो चुके हैं जब पीड़िता पर आरोपियों द्वारा हमले किए जाते हैं। ऐसे मामलों में आरोपियों की जमानत नहीं होनी चाहिए।