-सरकार ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को बीईओ बनाने की घोषणा की
-प्रधानाचार्य पद पर 2012 से नहीं हुई पदोन्नति, ज्यादातर सेवानिवृत्ति के करीब
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शासन द्वारा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की गई है। हालांकि शिक्षक संगठनों ने इस घोषणा को धरातल पर अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि पिछले लगभग 14 वर्षों से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई है।
जिले में वर्तमान में मात्र 15 प्रधानाचार्य कार्यरत हैं। इनमें से अधिकांश सेवानिवृत्ति के करीब हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य पद पर आखिरी पदोन्नति वर्ष 2012 में हुई थी। तब से कई प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को पहले प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति करनी चाहिए। इसके बाद ही प्रधानाचार्यों को बीईओ पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश उच्च प्राथमिक/जूनियर हाईस्कूल शिक्षक के जिला मंत्री राहुल राठी ने बताया कि पदोन्नति न होने से प्रधानाचार्यों की संख्या नाममात्र बची है। जो प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, उनकी सेवानिवृत्ति नजदीक है। ऐसे में वे पदोन्नति लेकर दूसरे जिलों में क्यों जाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष चित्र कुमार ने भी इस बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा अच्छी है, लेकिन पहले उच्च प्राथमिक में प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति दी जाए।
-प्रधानाचार्य बनने के इंतजार में सेवानिवृत्त हो गए शिक्षक
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अधिकांशत: इंचार्ज अध्यापक ही प्रधानाचार्य पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पदोन्नति नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए। कंपोजिट विद्यालय करौंदा से सेवानिवृत्त हुए रामप्रसाद बताते हैं कि उन्होंने सेवानिवृत्ति तक इंचार्ज अध्यापक के रूप में काम किया। सेवानिवृत्ति के वक्त उन्हें प्रधानाचार्य पद का वेतनमान मिला था। किसी ने किसी अड़चन के चलते उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पदोन्नति रुकी रही और आज भी रुकी हुई है।