- कोरोना काल से वार्ड में रखे वेंटिलेटर, एक दिन भी नहीं चले
- मेडिकल अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगे हुए हैं वेंटिलेटर
- 17 वेंटिलेटर मेडिकल अस्पताल उपलब्ध हैं
- 02 गंभीर स्थिति के मरीज रोजाना मेरठ रेफर हो रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कोरोना काल से ही मेडिकल अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हैं। मगर, क्या फायदा जब मरीज को जरूरत पड़ने पर उसे मेरठ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में बेहतर सुविधाओं के दावे तो खूब किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों को परेशानी का अलावा कुछ हाथ नहीं लग रहा।
मेडिकल अस्पताल में कोरोना काल से 17 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। मेडिकल अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक सभी वेंटिलेटर सही है, मगर स्टाफ की कमी होने से इन्हें नहीं चलाया जा रहा है। वेंटिलेटर चलाने के लिए छह बेड के वार्ड में दो स्टाफ नर्स होनी चाहिए। मगर, मेडिकल अस्पताल में तो पूरे वार्ड में एक स्टाफ नर्स है।
इसकी वजह से वेंटिलेटर सिर्फ वार्ड में ही रखे हुए हैं। उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर मरीजों को मेरठ रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल अस्पताल से रोजाना मेरठ के लिए करीब दो गंभीर मरीज रेफर हो रहे हैं, जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
एक वार्ड में सिर्फ एक ही स्टाफ नर्स
हेड नर्स पुष्पा निगम ने बताया कि मेडिकल अस्पताल में स्टाफ नर्स की भी कमी चल रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक वार्ड में सिर्फ एक ही स्टाफ नर्स है। प्रशिक्षण लेने आ रहे बच्चों के साथ मिलकर वार्ड चलाया जा रहा है।
मेडिकल अस्पताल में पांच एनेस्थेटिक तैनात
मेडिकल अस्पताल में पहले एक ही एनेस्थेटिक ही तैनात था। मगर, अब पांच एनेस्थेटिक तैनात हो गए हैं। वेंटिलेटर एनेस्थेटिक की निगरानी में ही चलाया जाता है। एनेस्थेटिक तो पर्याप्त हैं, लेकिन अभी वेंटिलेटर चलाने के लिए अन्य स्टाफ की आवश्यकता है।
क्या बोले चिकित्सक
रक्षक प्रणाली के लिए वेंटिलेटर आवश्यक
मेडिकल अस्पताल के सर्जन डॉ. दिनेश गोस्वामी का कहना है कि वेंटिलेटर मनुष्य की रक्षक प्रणाली के लिए जरूरी है। अगर व्यक्ति की रक्षक प्रणाली का करना बंद कर देती है तो मरीज को वेंटिलेटर पर लिटाया जाता है। फिलहाल गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है
गंभीर चोट या ट्रामा होने पर वेंटिलेटर की जरूरत
मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि सिर में गंभीर चोट, छाती में ट्रामा, सिर में ट्रामा होने पर मरीजों को वेंटिलटर की जरूरत पड़ती है। मरीजों को वेंटिलेटर के जरिए कृत्रिम सांस दिलाई जाती है।
मेडिकल अस्पताल में सभी वेंटिलेटर चालू हैं। टेक्नीशियन तो हैं, लेकिन स्टाफ नर्स की कमी है। जिस वजह से वेंटिलेटर चलाने में दिक्कत आ रही है। पूरा स्टाफ आने के बाद ही वेंटिलेटर सही तरह से चालू किए जा सकेंगे। - डाॅ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर