बिजनौर में गांव पेद्दा में छेड़खानी की घटना तो रोज हो रही थी, पर अंदर ही अंदर इसको लेकर विरोध की चिंगारी सुलग रही थी। कई दिनों से किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी थी। शुक्रवार को चिंगारी ज्वालामुखी बनकर फट पड़ी।
गांव पेद्दा में छेड़खानी को लेकर मारकाट की यह पहली इतनी बड़ी घटना है। गांव पेद्दा व नया गांव आमने-सामने हैं। दोनों गांवों की युवतियां पेद्दा स्कूल जाने के लिए पेद्दा के बाहर बस स्टैंड पर आकर खड़ी होती हैं। युवतियों के पास से तेजी से बाइक चलाने को लेकर युवतियों के परिवारजन एतराज करते आए हैं, पर कभी इस पर रोक नहीं लगी। जो युवक-युवतियों के बीच से तेजी से बाइक निकालते हैं, उन्हें रोकने के लिए किसी भी ग्रामवासी ने कोई कदम नहीं उठाया।
यही घटना छेड़छाड़ में तब्दील होती गई, पर इसकी शिकायत कभी पुलिस में नहीं की गई। पेद्दा गांव की आबादी करीब 3500 है। इस गांव में 65 प्रतिशत मुस्लिम व 35 प्रतिशत हिंदू रहते हैं। अधिकांश हिंदू परिवार संपन्न हैं। मुस्लिमों में आर्थिक रूप से कमजोर व मजबूत दोनों तरह के लोग हैं। जो तीन लोग मरे हैं, वे मजदूरी करने वाले थे। कभी गांव में कोई फसाद नहीं हुआ। मिल जुलकर लोग प्रेम व भाईचारे के साथ रहते। मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के दौरान भी यह गांव ही नहीं पूरा जनपद पूरी तरह शांत रहा। किसी ने मुंह तक नहीं उठाया। शुक्रवार को हुई घटना को देखने से लगता है कि पहले से ही इस घटना को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी।
छेड़खानी को लेकर अंदर ही अंदर विरोध का लावा सुलग रहा था। घटना के दौरान गांव के बाहर एक राजनीतिक दल के नेता व एक बड़े व्यक्ति के सक्रिय होने की बात कही जा रही है। घटना के बाद नेता ध्रुवीकरण करने में भी लगे हैं। सपा व बसपा नेता मुस्लिमों के घर जा रहे हैं, तो भाजपा नेता हिंदुओं को पीड़ित बताते हुए उनकी हिमायत कर रहे हैं।
दंगे रोकने हैं तो रोकनी होंगी छेड़खानी की घटनाएं ः बिजनौर। छेड़खानी की घटना को अब जरा भी नजर अंदाज करना गलत होगा। ऐसे मामलों में सख्ती करनी होगी। ऐसी घटनाएं कभी भी बड़ा फसाद करा सकती है। अगर दंगा फसाद को रोकना है तो छेड़खानी की घटनाओं को हर हाल में रोकना होगा। छेड़खानी की घटना बड़ी फसाद की घटनाओं को अंजाम दे रही है। छेड़खानी की घटनाओं पर अब ज्यादा सख्ती करने की जरूरत है। इन्हें नजर अंदाज करना महंगा साबित भी हो सकता है। इसलिए ऐसी घटनाओं पर पुलिस को पैनी नजर रखनी होगी और बड़ी कार्रवाई करनी होगी। तभी बड़ी घटनाओं को होने से रोका जा सकता है।
पेद्दा गांव में पसरा सन्नाटा, पशु चारे को तरसे
बिजनौर में गांव पेद्दा में शुक्रवार को तीन लोगों की मौत के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। बेबस पशु चारे के लिए तरस रहे हैं। उन्हें चारा तक देने वाला कोई नहीं हैं। आरोपियों के घरों के दरवाजे बंद हैं। कुछ घरों में केवल महिलाएं ही नजर आ रही हैं। मृतकों के घरों पर रिश्तेदारों का तांता लगा है। उनके घरों पर कोहराम मचा हुआ है। गांव पेद्दा में हर जगह पुलिस तैनात है। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है। घटना के बाद से लोग सहमे हैं। लोगों को अभी भी डर है कि उनके साथ कोई घटना न हो जाए। चौराहों व पेड़ों की छांव में टुकड़ों के रूप में बंटे लोगों की जुबान पर शुक्रवार की घटना है। पीड़ित पक्ष का हर कोई लोग यही कह रहा है कि उन्होंने ऐसा क्या कसूर किया था जो इस तरह उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। कोई बात थी तो दूसरे पक्ष के लोग घर पर आकर कहते। इस तरह गोलियां बरसाकर इन लोगों की जान क्यों ली। गांव में मृतकों के घरों में रिश्तेदारों व मिलने वालों का तांता लगा हुआ है। घरों में कोहराम मचा है। हमलावरों के घरों के पुरुष फरार हैं। इन किसानों के पशुओं को चारा व पानी देने वाला कोई नहीं है। कुछ घरों में महिलाएं जरूर नजर आ रही हैं, पर वे भी सहमी हुई हैं। विश्वकर्मा समाज के एक व्यक्ति का दरवाजा टूटा हुआ है। पूरे घर में कोई नजर नहीं आ रहा है। इन गायों को शुक्रवार से चारा व पानी तक नहीं मिला है। पत्रकारों ने पशुओं को चारा, पानी न मिलने की बात एसपी देहात डा.धर्मवीर सिंह से कही।