कलक्ट्रेट में जन सूचना अधिकार के तहत वाद सुनते सूचना आयुक्त मोहम्मद हाफिज उस्मान।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में सूचना के अधिकार के तहत बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में सूचना आयुक्त की अदालत लगी। इसमें सूचना आयुक्त ने रामपुर के सिटी मजिस्ट्रेट तथा डीआईओएस पर पच्चीस-पच्चीस हजार का जुर्माना ठोका है। दोनों अधिकारियों पर यह जुर्माना मांगी गई सूचनाओं की जानकारी नहीं देने तथा बार -बार बुलाने के बाद भी आयोग के समक्ष हाजिर नहीं होने पर किया गया है।
सूचना आयुक्त मोहम्मद हाफिज उस्मान ने कहा कि सूचना का अधिकार आम व्यक्ति केे लिए मजबूत कानूनी हथियार है। आयुक्त ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कानून से जरूरतमंद को इंसाफ मिले तथा इसका दुरुपयोग नहीं हो। पत्रकार वार्ता में सूचना आयुक्त मोहम्म्द हाफिज उस्मान ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून वर्ष 2005 में लागू हुआ। कानून जनसाधारण को सस्ता मजबूत तथा तेज गति से इंसाफ दिलाने वाला क्रांतिकारी कानून है। आरटीआई प्रत्येक व्यक्ति का हक है। अधिकारी सूचना मांगने वाले को कमजोर व बेबस न समझें। आयोग को प्राप्त शिकायतों में से 40 प्रतिशत गांवों की हैं, जिनमें मनरेगा आदि विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार के संबंध में सूचना मांगी गई हैं। बाकी में से 40 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न, पेंशन तथा प्रमोशन से जुड़ंी हैं। उन्होंने कहा कि जिले के आला अधिकरी आरटीआई को गंभीरता से नहीं लेते हैं। यदि अधिकारी निष्पक्षता से काम करें, तो मामले के निस्तारण में पारदर्शिता रहेगी। सूचना मांगने वाले को परेशानी से बचाने के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक कार्यालय में जन सूचना अधिकारी तथा अपीलीय अधिकारी का नाम तथा कार्यालय में बैठने का समय अंकित हो। कानून के प्रचार प्रसार के लिए बैठक की जाएं।