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Bijnor News: गांव शादीपुर में जिंदा है होली के गीतों की परंपरा

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कोतवाली देहात। होली के त्योहार पर युवा पीढ़ी डीजे पर थिरकती नजर आती है, लेकिन आज भी पारंपरिक होली गीत अपना विशेष स्थान रखते हैं। होली गीतों में जहां गहरा अर्थ छुपा होता है, वहीं ये जनमानस तथा प्रकृति से जुड़े होते हैं।
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ग्राम शादीपुर में आज भी पारंपरिक होली गीत गाए जाते हैं। होली गायक नरेश सिंह बताते हैं कि परंपरागत होली गीत पुराने समय में हर गांव में गाए जाते थे, लेकिन अब यह परंपरा कुछ स्थानों पर खत्म हो गई है। ग्राम शादीपुर में फाल्गुन का महीना शुरू होते ही होली के गीत गाए जाने लगते थे। अब रंग की एकादशी से रोजाना होली गीत गाए जाते हैं।
गांव निवासी नरेश सिंह बताते हैं कि होली के गीत गाते हुए रंग की एकादशी को शोक उठाया जाता है। बीते एक साल में जिन परिवारों में किसी की मौत हो जाती है, उन सभी घरों में हुरियारे पहुंचते हैं और होली गीत गाते हुए परिवार को होली का त्योहार मनाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
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जीवन के रंग समेटे हैं होली के गीत : गांव शादीपुर में गाए जाने वाले होली गीतों में पौराणिक आख्यानों के साथ ही प्रकृति का जिक्र रहता है। नरेश सिंह बताते हैं कि ‘निर्मल भवन तुम्हारा भवानी, निर्मल भवन तुम्हारा, कहां-कहां के देवा राज बुलाए’, श्री कृष्ण के जन्म के संबंध में ‘जागा ब्रज जागा, अवतार हुआ ब्रज जागा।’ अादि होली के गीत गाए जाते हैं।
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