हल्दौर के गांव चूड़ियाखेड़ा के जंगलों में स्थित भाई-बहन का मंदिर। संवाद
- फोटो : मरीजों को देखते फिजीशियन डॉ.कौशलेंद्र प्रकाश।
हल्दौर। चूड़ियाखेड़ा के जंगलों में स्थित मंदिर भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन और भैयादूज जैसे पावन पर्वों पर यहां क्षेत्र व दूर-दराज से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु देव रूप में भाई-बहन की मूर्तियों के समक्ष पूजा-अर्चना करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार एक भाई अपनी बहन को उसकी ससुराल से पैदल लेकर अपने गांव लौट रहा था। जब वह दोनों चूड़ियाखेड़ा के जंगल से गुजर रहे थे, तभी कुछ डाकुओं ने उन्हें रोक लिया। डाकुओं ने बहन के साथ अभद्र व्यवहार और भाई के साथ मारपीट शुरू कर दी। असहाय भाई-बहन ने ईश्वर से रक्षा की प्रार्थना की और पृथ्वी में समा जाने की विनती की। कहते हैं कि उनकी प्रार्थना सुन ली गई और वे दोनों भूमि में समा गए, जिससे डाकुओं की यातना से मुक्त हो गए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने इस स्थल को पवित्र मानकर वहां एक मंदिर का निर्माण कराया। यह आज भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक स्थल बन चुका है। मंदिर में भाई-बहन की प्रतिमाएं स्थापित हैं। साथ ही भगवान शिव परिवार, मां शेरावाली, हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तियां विराजमान हैं। रक्षाबंधन और भैयादूज के पर्व पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन होता है। गांव नांगलजट निवासी सुनील प्रधान, जितेंद्र शर्मा, बिट्टू चौधरी आदि का कहना है कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि यह मंदिर सतयुग कालीन है। हमारी आस्था इस स्थल से अटूट है।