पालतू जानवर, पेस्टीसाइड भी मौत का कारण
जिन गुलदारों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा, वन विशेषज्ञ उनके लिए खेतों में प्रयोग हो रहे पेस्टीसाइड और बीमार पालतू जानवरों का शिकार करने को मान रहे हैं। गुलदार खेतों में शरण लिए हुए हैं, किसान खेतों में पेस्टीसाइड भी डाल रहे हैं। यह इतने खतरनाक हैं कि कई बार खुद किसान तक को इनसे तमाम दिक्कतें हो जातीं हैं। बीमार पालतू जानवर का शिकार कर गुलदार बीमार भी पड़ रहे हैं।
नहीं नजर आ रहा समाधान
जिले में इस समय गुलदारों की समस्या विकराल हो चुकी है। इस साल छह से ज्यादा लोगों की जान गुलदार के हमले में नगीना और अफजलगढ़, रेहड़ क्षेत्र में जा चुकी है। रेहड़ का गुलदार अभी तक भी पकड़ा नहीं जा सका है, उसके लिए कानपुर और दिल्ली तक से टीम को बुलाया गया था। ऐसे में वन विभाग के पास खुद जवाब नहीं है कि गुलदार की समस्या से लोगों को कैसे निजात दिलाई जाए।
ये गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील
वन विभाग ने गुलदार और बाघों को लेकर कुछ गांव चिह्नित किए गए हैं, जहां इनका सबसे अधिक खतरा है। इनमें अमानगढ़ से सटे देवानंदपुर गढ़ी, रेहड़, नवाबाद जंगल, केहरीपुर जंगल, किरतपुर, रानीनांगल, फतेहपुर धारा, कल्लूवाला, लालबाग, मलौनी, मीरापुर उत्तरी। नगीना रेंज से सटे भिक्कावाला, बनियोंवाला, इस्लामनगर, मुरलीवाला, जामुनवाला, लड्डूवाला, खैरीखत्ता, जमनपुर, रसूलपुर, रसूलाबाद, प्रेमपुरी जैसे गांव शामिल हैं।
जहां भी गुलदार की सूचना मिलती है, वहां टीम भेजकर पिंजरे लगवाए जाते हैं। ग्रामीणों को गुलदार से बचने के तरीके भी बताए जा रहे हैं। जंगल क्षेत्रों में वाहन की गति अधिक न रखने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि वन्य जीवों को नुकसान न हो। हाल ही में जिन गुलदारों की मौत हुई है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कारण पता चल पाएगा। पिछले कुछ सालों में जो गुलदारों की मौत हुई हैं, उनमें आपसी संघर्ष और दुर्घटना बड़ा कारण रही। - अरुण सिंह, डीएफओ बिजनौर
लोगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम जारी
- खेतों में दाे या उससे अधिक के समूह में जाएं
- गन्ना काटने से पहले वहां हांका करें, ताकि वन्य जीव दूसरी जगह पर चला जाएं
- खेत पर काम करते समय मोबाइल फोन या रेडियो पर तेज ध्वनि वाले गाने चलाएं
- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं
- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नेकपैड पहनें
- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से ही करें
- वन्य जीव दिखने पर वन अधिकारियों को तुरंत सूचना दें
यह न करने की दी गई सलाह
- खेतों पर अकेले न जाएं
- जंगल में छोटे बच्चों को अकेले न भेजें
- गन्ने की कटाई बैठकर या झुककर न करें
- रात में खेतों की रखवाली करते समय भूमि पर या चारपाई पर न सोएं
- वन्य जीव दिखने पर उसे न छेड़ें और उसके रास्ते में न आएं
- पिछले एक साल में कब कब हुई गुलदार की मौत
रेंज तारीख गुलदार कारण
नगीना 09 अप्रैल 22 मादा आपसी संघर्ष
नजीबाबाद 13 अप्रैल 22 मादा ट्रेन दुर्घटना
नजीबाबाद 18 अप्रैल 22 मादा सड़क हादसा
नगीना 03 मई 22 मादा सड़क हादसा
धामपुर 14 मई 22 मादा आपसी संघर्ष
चांदपुर 22 नवंबर22 मादा सड़क हादसा
धामपुर 14 मार्च 23 नर अज्ञात
धामपुर 20 मार्च 23 मादा आपसी संघर्ष
अमानगढ़ 25 मई 23 मादा आपसी संघर्ष
बिजनौर 01 जून 23 नर स्पष्ट नहीं
धामपुर 14 जून 23 मादा स्पष्ट नहीं
धामपुर 15 जून 23 मादा स्पष्ट नहीं
दो साल की स्थिति
26 गुलदार की पिछले दो साल में हुई मौत
19 मादा गुलदार हैं मरने वालों में
07 नर गुलदार की हुई मौत
09 गुलदार की मौत दुर्घटना में हुई
04 गुलदार की मौत आपसी संघर्ष में हुई
07 गुलदार की मौत का कारण नहीं हुआ स्पष्ट
किस रेंज में कितने गुलदार की मौत
- धामपुर रेंज में दस गुलदार की मौत
- बिजनौर रेंज में पांच गुलदार की मौत
- नजीबाबाद रेंज में चार गुलदार की मौत
- चांदपुर रेंज में तीन गुलदार की मौत
- नगीना रेंज में तीन गुलदार की मौत