बिजनौर। उपभोक्ताओं को तमाम कंपनियों और विभागों से न्याय दिलाने के लिए बना उपभोक्ता फोरम खुद ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। फोरम में बीमा कंपनियां भी जवाब दाखिल करने में आधे से ज्यादा समय बर्बाद कर देती हैं। उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने में फोरम को लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
उपभोक्ताओं को सरकार व कंपनियों की ओर से भुगतान करने पर अनेक सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन कई बार उपभोक्ता पात्र होने के बाद भी या तो इन सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं या फिर कंपनी उनसे धोखाधड़ी कर देती हैं। उपभोक्ताओं को उसका हक दिलाने के लिए हर जिले में उपभोक्ता फोरम का गठन किया गया है। लेकिन जिले में बनाया गया उपभोक्ता फोरम स्टाफ की कमी से परेशान है। चेयरमैन केवल 15 दिन ही जिले में बैठते हैं और 15 दिन मेरठ में। फोरम दो सदस्यों के बजाए केवल एक ही सदस्य नियुक्त है। फोरम में 90 दिन में किसी केस में फैसला देने का प्रावधान है लेकिन यह समय बहुत कम है। उपभोक्ताओं को न्याय लेने में कभी कभी सालों लग जाते हैं।
हर महीने आते हैं 15 से 20 केस
उपभोक्ता फोरम में हर महीने करीब 15 से 20 केस आते हैं। अधिकतर केस बीमा कंपनी, चिकित्सीय सुविधाओं, बिजली बिल आदि से जुड़े होते हैं। बीमा कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को क्लेम न दिए जाने के कई मामलों में उपभोक्ता फोरम ने वादियों को राहत पहुंचाई है।
कंपनी महीनों में देती हैं जवाब
नियम है कि फोरम 90 दिन में उपभोक्ताओं को न्याय दे, लेकिन जिस कंपनी के खिलाफ केस डाला जाता है वह कंपनी ही अपना जवाबदावा दाखिल करने में कई कई महीने लगा देती है। ऐसे में 90 दिन में न्याय दूर की कौड़ी है।
शासन दे ध्यान
उपभोक्ता फोरम में वकील अमित अग्रवाल के अनुसार स्टाफ की कमी से उपभोक्ताओं को समय से न्याय नहीं मिल पाता है। शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
कंपनियों का रवैया गैर जिम्मेदाराना
उपभोक्ता फोरम में वकील दीपराज जैन के अनुसार कंपनियां उपभोक्ताओं के केस दाखिल करने पर गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हैं। उन्हें जल्दी जवाबदावा दाखिल करना चाहिए।