बिजनौर। गरीब परिवारों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना में बजट की तंगी चल रही है। दरअसल पांच दिसंबर के बाद से मजदूरों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। मजदूरी का पैसा मिलने के इंतजार में मजदूर है। उधर अधिकारी बजट न आने की बात कह रहे हैं। ऐसे में पैसा कब आएगा, यह भी अभी साफ नहीं है।
जिले के 11 ब्लॉक की 1123 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत कार्य चल रहे हैं। जिनमें 228867 मजदूर सक्रिय हैं, इनमे 74146 महिलाएं भी शामिल हैं। हालांकि 369376 मजदूर पंजीकृत हैं। मनरेगा के तहत गांव के गांव में कच्चे या पक्के कामों में मजदूर परिवारों को रोजगार मिलता है। जिससे उनका चूल्हा जलने लायक मजदूरी मिल जाती है।
नियमानुसार 15 दिन में मजदूरी का पैसा खातों में पहुंचने का नियम है। मगर इस साल लेटलतीफी ज्यादा हो चुकी है। अबकी बार पांच दिसंबर के बाद से कोई पैसा मजदूरों को नहीं मिला है, जबकि इन्होंने मजदूरी की है।
इस वित्तीय बजट में 45 लाख 89 हजार रोजगार दिवस सृजित किए गए हैं। यानि रोजगार दिवस के मामले में आंकड़ा 98 फीसदी हो सका है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अगर समय से मजदूरी मिलती तो यह आंकड़ा 110 फीसदी पहुंच सकता था। संवाद