बिजनौर। पथरा गांव के नीरज की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस मनोवैज्ञानिक परीक्षण का सहारा लेगी। पुलिस के रडार पर आए दस संदिग्धों का मनोवैज्ञानिक असेसमेंट टेस्ट कराया जाना है। इसके लिए पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र भेज दिया है। तारीख तय होने के बाद संदिग्धों को प्रयोगशाला ले जाएगा।
एक सितंबर 2025 की शाम गांव पथरा निवासी नीरज उर्फ नीटू 35 वर्ष पुत्र करण सिंह खेत पर चारा काटने के लिए गया। जहां पर नीरज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नीरज बिजनौर नगर पालिका में कूड़े की गाड़ी पर आउटसोर्सिंग कर्मी के तौर पर बतौर चालक भी काम करता था। नीरज की हत्या के खुलासे के लिए पुलिस ने तमाम प्रयास किए। सर्विलांस का भी सहारा लिया गया। मुखबिरों पर भी भरोसा जताया। संदिग्धों से पूछताछ भी की गई थी। मगर तमाम प्रयास बेनतीजा रहे। नीरज की हत्या के बाद से अब तक परिजन खुलासे के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक भी गए। तमाम प्रयास के बाद भी कोई सुराग नहीं लग पाया तो पुलिस ने दस संदिग्धों को चिह्नित किया है। इन पर हत्या करने का शक है। संदिग्धों से सच उगलवाने के लिए दस लोगों का मनोवैज्ञानिक असेसमेंट टेस्ट कराया जाएगा। यह नारको से भी उन्नत विधि है। जोकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला में कराया जाएगा।
ऐसे होता है मनोवैज्ञानिक असेसमेंट टेस्ट
इस टेस्ट को करने के लिए कोई दवा नहीं दी जाती है। इसमें प्रश्नावली, रेटिंग स्केल, बातचीत और पेपर-पेंसिल टेस्ट का प्रयोग किया जाता है। एक ही सवाल को कई लोग अलग तरीकों से पूछकर उसकी मानसिक स्थिति और मन में चल रही गतिविधियों को भांपते हैं। इसके विपरीत नारको टेस्ट में कुछ खास दवाएं दी जाती हैं, जिससे वह अर्धबेहोशी की स्थिति में चला जाता है और उसकी तार्किक क्षमता कमजोर हो जाती है।
नीरज की हत्या के मामले में कुछ संदिग्धों का मनोवैज्ञानिक असेसमेंट टेस्ट कराया जाएगा। इस संबंध में पत्राचार किया जा चुका है।
....केके बिश्नोई, एसपी बिजनौर