बिजनौर। गांव भोगपुर में मारे गए गुलदार ने ही तो जिले में छह लोगों की जान नहीं ली थी। वन विभाग अब इस दिशा में जांच शुरू कर रहा है। छह जनवरी को भोगपुर में मारे गए गुलदार व इससे पहले गांव मोहंडिया में ट्रैप हुए गुलदार के फोटो को मिलाया जाएगा। विशेषज्ञ देखेंगे कि दोनों गुलदार कहीं एक ही तो नहीं है। इसके बाद आगे की तैयारी की जाएगी। वन विभाग ने भोगपुर में मारे गए गुलदार का फोटो इंडियन वैटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट से मांगा गया है।
दिसंबर और जनवरी में जिले भर में गुलदार का आतंक रहा। गुलदार ने सबसे पहले नगीना के गांव चमरू नवादा निवासी शमला देवी को 27 नवंबर को खेत में काम करते समय मारा था। इससे पहले गुलदार द्वारा किसी इंसान को मारने की घटना जिले में नहीं हुई थी। वन विभाग के अफसरों को भी तब यकीन नहीं हुआ था कि गुलदार ने इंसान की जान ले ली है, लेकिन इसके बाद गुलदार के हमलों में इंसानों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। गुलदार ने दस दिसंबर में गांव सराय आलम निवासी चमन, 16 दिसंबर को गांव अकबरपुर चौगांवा निवासी चेतन, 25 दिसंबर को गांव असगरपुर में शानू और 26 दिसंबर को गांव मोहंडिया में खेत में काम करते हुए शानू को मार डाला था। इसके बाद वन विभाग सतर्क हुआ और गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे व ट्रैप कैमरे लगाए गए। ट्रैप कैमरे में गुलदार कैद भी हुआ। छह जनवरी को गांव भोगपुर में गुलदार ने स्कूल के बाहर खेल रहे प्रशांत को मारकर खेत में खींच लिया था, तब गांव वालों ने मिलकर गुलदार को खेतों में खींचकर मार डाला था। गांववालों ने गुलदार को पीट पीटकर व गोली मारकर मार दिया था। तब से अब तक गुलदार दिखने की सैकड़ों घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन किसी इंसान पर हमला नहीं हुआ है। हालांकि गुलदार अब भी मोहंडिया में लगे ट्रैप कैमरे में कैद हो रहा है, लेकिन उसे अब तक दिन में नहीं देखा गया है। किसी भी गांव वाले के सामने गुलदार नहीं आया है। इसे लेकर वन विभाग भी अब संशय में है। विभाग को लगता है कि जिले में छह लोगों की जान लेने वाला गुलदार भोगपुर में मारा गया गुलदार ही हो सकता है। गुलदार अगर हिंसक हो जाए तो वह बाद में एकदम से हमले करना बंद नहीं करता है। वन विभाग गांव भोगपुर में मारे गए गुलदार व इससे पहले 27 दिसंबर को गांव मोहंडिया में दिखे गुलदार का मिलान कराना चाहता है। इसके लिए दोनों के फोटो चाहिए। मोहंडिया में दिखे गुलदार के फोटो तो वन विभाग के पास हैं ही, भोगपुर में मारे गए गुलदार के फोटो इंडियन वैटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट से मंगवाए जा रहे हैं।
मालन नदी किनारे के क्षेत्र में किए हमले
गांव भोगपुर में मारा गया गुलदार मालन नदी के किनारे आगे बढ़ा था। आमतौर पर गुलदार तराई क्षेत्र में ही रहते हैं। वहां वे अपनी प्यास तो मिटाते ही हैं, पानी पीने के लिए नदी पर आने वाले वन्य जीवों का भी शिकार करते हैं।
कराएंगे जांच
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार बहुत शर्मिला जानवर होता है। गांव मोहंडिया में गुलदार इंसानों के सामने तक नहीं आ रहा है, जबकि सभी हमलों में इंसानों की मौत दिन में किए हमले में हुई थी। मोहंडिया में शुरुआत में ट्रैप कैमरे में कैद हुए गुलदार और भोगपुर में मारे गए गुलदार के फोटो का मिलान विशेषज्ञों से कराया जाएगा।
नजीबाबाद क्षेत्र के ग्राम भोगपुर में ग्रामीणों द्वारा मारा गया गुलदार(फाइल फोटो)।- फोटो : BIJNOR