-उच्च शिक्षा में हिंदी की पुस्तक जिले से ही हुई आरंभ
कोतवाली देहात (बिजनौर)। जनपद बिजनौर के साहित्यकारों और लेखकों ने हिंदी को समृद्ध किया है। उच्च शिक्षा में हिंदी की पुस्तकों का आरंभ भी इसी जनपद से हुआ है। जनपद के वीरेंद्र राजपूत ने वेदों का काव्यानुवाद किया है। जनपद में जन्म लेने वाले कई लेखकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बताया जाता है कि एक समय गुरुकुल कांगड़ी बिजनौर जनपद का हिस्सा था। अंग्रेजी शासनकाल में उच्च शिक्षा की पुस्तकें केवल अंग्रेजी में ही आती थीं। हिंदी या किसी भी भारतीय भाषा में पुस्तक प्रकाशित नहीं होती थीं। सबसे पहले गुरुकुल कांगड़ी में स्वामी श्रद्धानंद ने अंग्रेजी की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कराया। इसके लिए स्वामी श्रद्धानंद ने विद्यालय के अध्यापकों तथा छात्रों को इस कार्य में लगाया और हिंदी अनुवादित उन पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल भी किया।
जनपद के राजपुर नवादा में जन्मे दुष्यंत कुमार को हिंदी ग़ज़ल का प्रणेता कहा जाता है। उर्दू में कही जाने वाली गजल को दुष्यंत कुमार ने आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत किया। उर्दू से निकलकर गजल हिंदी में लिखी जाने लगी। इसका श्रेय जनपद के दुष्यंत कुमार को ही जाता है। उनकी रचनाएं सड़क से लेकर संसद तक पढ़ी और गुनगुनायी जाती हैं। - दुष्यंत कुमार
-
पंडित पदम सिंह शर्मा देश के जाने-माने साहित्यकार रहे। उन्हें बिहारी सतसई पर उनकी टीका को पहला मंगला पारितोषिक सम्मान प्राप्त हुआ था। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास सेवा सदन की समीक्षा भी लिखी। मुंशी प्रेमचंद भी उनके लेखन का लोहा मानते थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद उन्हें अपना गुरु मानते थे। - पदम सिंह शर्मा
रविंद्र नाथ त्यागी को व्यंग्य विधा का मजबूत स्तंभ माना जाता है। हरिशंकर परसाई और शरद जोशी के बाद उन्हें व्यंग विधा का तीसरा स्तंभ बताया गया। रविंद्र नाथ त्यागी ने काव्य में सूखे और हरे पत्ते, कल्पवृक्ष, सलीब से नाव तक, अंतिम बसंत सहित दर्जन भर से अधिक पुस्तकों की रचना की। - रविंद्र नाथ त्यागी
-
जनपद के धामपुर में जन्मे पंडित रूद्र दत्त शर्मा ने पत्रकारिता जगत में हिंदी को विशिष्ट स्थान दिलाने के लिए कार्य किया। सन 1869 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक इंद्रप्रस्थ प्रकाश का संपादन किया। मुरादाबाद से प्रकाशित आर्य विनय का सन 1875 में संपादन किया। सन 1889 में उन्होंने कोलकाता के प्रमुख समाचार पत्र भारत मित्र का भी संपादन किया। उन्होंने आर्यावर्त हिंदी बंगवासी और हित वार्ता अखबार का भी संपादन किया। पटना से प्रकाशित होने वाले भारत स्वप्न, आर्य मित्र का भी संपादन उन्होंने किया। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संपादन कार्य के अतिरिक्त उन्होंने कई पुस्तकों की रचना भी की, जिनमें स्वर्ग में सब्जेक्ट कमेटी, स्वर्ग में महासभा, पुराण परीक्षा, योग दर्शन, ज्ञान विज्ञान आदि प्रमुख हैं। - रूद्र दत्त शर्मा
-
जनपद में जन्मे वीरेंद्र कुमार राजपूत ने वेदों का काव्य अनुवाद किया है। इन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद का काव्यानुवाद का कार्य भी किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने बांध सर कफन चलो, दयानन्द महिमा, दयानन्द सप्तक, दयानन्द शतक सहित 14 पुस्तकों की रचना की है। वेदों के काव्य अनुवाद का कार्य देश भर में अनूठा है। -वीरेंद्र कुमार राजपूत