विदुर की धरती करेगी कन्हैया की नगरी में गो संवर्धन
बिजनौर। महात्मा विदुर की तपोभूमि बिजनौर से कन्हैया की भूमि मथुरा सहित देश भर में देशी लाल सिंधी गाय की नस्ल बढ़ाई जाएगी। जिले के नगीना में श्रीकृष्णा गौशाला में लाल सिंधी गाय की शुद्ध नस्ल मिली है। इस नस्ल के नंदी (सांड़) को मथुरा सहित देश के कई हिस्सों से मांग आ रही है। इन नंदी से लाल सिंधी गाय का कुनबा बढ़ाया जाएगा।
किसान अब पशुपालन को मुख्य व्यवसाय के रूप में भी अपनाने लगे हैं। किसानों ने पशुपालन को तो अपनाया, लेकिन देशी गायों से किसान किनारा करते चले गए। देशी नस्ल की गायों की बजाए एचएफ और जर्सी गाय किसानों के आंगन में खड़ी नजर आने लगीं। इससे देशी प्रजातियों को बहुत नुकसान हुआ। कभी काफी तादाद में पाई जाने वाली देशी नस्ल की लाल सिंधी गाय जिले तो क्या सूबे के किसानों के पास से लगभग गायब हो चुकी है। पशुपालन विभाग की बुकलेट के अनुसार साल 2012 की गणना में यूपी में एक भी लाल सिंधी गाय नहीं मिली थी।
श्रीकृष्ण गौशाला की अध्यक्ष अलका लाहोटी ने लाल सिंधी नस्ल की गायों का संवर्धन किया। उन्होंने कई जगह से लाकर लाल सिंधी गाय पालीं। एनडीडीबी की ओर से कराई गई जांच में उनके यहां पल रहीं लाल सिंधी गाय एकदम शुद्ध नस्ल की मिली थीं। उनके प्रयास से एक छोटी सी गौशाला में लाल सिंधी प्रजाति की शुद्ध नस्ल बची रही। अब इस नस्ल को पूरे भारत में बढ़ाने की बात कही जा रही है। खासतौर से धार्मिक कार्यों से जुड़ीं गौशालाएं लाल सिंधी नस्ल को बढ़ाना चाहती हैं। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से लाल सिंधी नस्ल के नंदी के लिए कई गौशालाओं ने अलका लाहोटी से संपर्क किया है। इसके अलावा दक्षिण भारत से भी नंदी मांगा गया है। अभी केवल हरियाणा में ही एक नंदी भेजा गया है।
गौशाला में लाल सिंधी नस्ल की 21 गाय
श्रीकृष्णा गौशाला में इस समय लाल सिंधी नस्ल की 21 गाय और 17 बच्चे हैं। इनमें नौ नंदी शामिल हैं। इन नंदी की खुराक का बहुत ध्यान रखा जा रहा है और खासतौर पर नंदी के लिए तैयार होने वाला पोषक तत्व युक्त मिनरल मिक्सचर दिया जा रहा है। थोड़ा और बड़ा होने पर इन नंदी को दूसरी जगहों पर भेजा जाएगा। इन गायों के गोबर से दीये व मूत्र से अर्क बनाकर बेचा जाता है। लाल सिंधी गाय की नस्ल में रोग प्रतिरोधक क्षमता विदेशी नस्ल की गायों से अधिक होती है। ये विदेशी नस्ल की गायों के मुकाबले कम बीमार होती हैं। इनका दूध ज्यादा गाढ़ा होता है। देशी गाय का गोबर व मूत्र जैविक खेती में बहुत काम आता है। ये एक दिन में दस से 12 लीटर दूध दे सकती हैं। लाल सिंधी नस्ल को धूप बहुत पसंद होती है। गर्मी में जहां विदेशी नस्ल की गाय की हालत धूप में बीमार हो जाती है लाल सिंधी गाय धूप में आराम से बैठी रहती है।
देशी परिस्थितियों का मुकाबला कर रही है देशी गाय
श्रीकृष्ण गौशाला की संरक्षक अलका लाहोटी के अनुसार लाल सिंधी गाय का कुनबा बढ़ना बहुत जरूरी है। देशी गाय ही देशी परिस्थितियों का सामना कर सकती है। लाल सिंधी के नंदी की बहुत मांग आ रही है। इन्हें और थोड़ा मजबूत होने पर भेजा जाएगा।