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Bijnor News: ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है क्रांति की धरा फीना

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नूरपर क्षेत्र के गांव फीना जाहर दीवान मूर्ति। संवाद
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- ब्रिटिश काल से ही शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी रहा है फीना, दिए शिक्षक, वैज्ञानिक और क्रांतिकारी
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- जिले में राजस्थान के राजाओं की ओर से लड़े गए मधी युद्ध का साक्षी रहा है गांव फीना


प्रमोद कुमार शर्मा



नूरपुर। क्रांति की धरा गांव फीना ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। मुगल काल में साल 1540 में मधी युद्ध को जीतने के बाद राजस्थान के राजा अमरजीत सिंह चौहान और उनके पुत्र इसी गांव में आबाद हो गए थे। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भी इस गांव के क्रांतिकारियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। क्रांतिकारियों में 13 लोगों की पहचान है, जबकि 33 गुमनाम रह गए।
सार्वजनिक आर्य इंटर काॅलेज के प्रबंधक मनोज कुमार राजपूत बताते हैं कि मधी युद्ध में राजा अमरजीत सिंह के छोटे पुत्र को गहरे घाव लग गए थे, जिससे कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया। उनकी पत्नी उनके साथ सती हो गईं। उस सती स्थल को दोरानी के नाम से ही पुकारा जाता है।
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ललित चौहान ने बताया कि फीना में कई प्राचीन देव स्थल मौजूद हैं। फीना में कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलते हैं। कभी गांव में सवा सौ सती स्थल मौजूद थे, इनमें से कुछ अब भी देखे जा सकते हैं।




फीना के लेखक इंजीनियर हेमंत कुमार के अनुसार गांव फीना में कुषाणकालीन साक्ष्य मौजूद हैं। सन 1023 के आसपास विख्यात लोक देवता जाहरवीर गोगा जी फीना से होकर गुजरे थे। फीना के बेल वाला चौक पर जाहरवीर गोगा जी से जुड़ा हुआ नीले घोड़े की दूब नामक एक देवस्थान है। भादो मास में फीना के खेड़े पर बने भव्य जाहरदेव मंदिर परिसर में एक विशाल मेले का आयोजन होता है।

1942 के विद्रोह में निभाई अहम भूमिका
पहली क्रांति के समय सदर अमीन रहे सर सैयद अहमद खान ने भी अपनी पुस्तक सरकशी ए जिला बिजनौर में फीना का कई जगह जिक्र किया है। फीना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों सैनिकों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और अध्यापकों के लिए प्रसिद्ध है। फीना के सोलह सूचीबद्ध और 33 गुमनाम सेनानी ज्ञात हैं। बसंत सिंह व रंधीर सिंह ने आसपास स्वतंत्रता की अलख जगाई। फीना के दो क्रांतिकारियों क्षेत्रपाल सिंह एवं डॉ. भारत सिंह ने जिले के अन्य दो क्रांतिकारियों के साथ मिलकर बिजनौर में दीवारों पर पोस्टर लगवाए थे।
1942 के विद्रोह में फीनावासियों की भूमिका इतनी बड़ी थी कि अंग्रेजों ने 80 सशस्त्र सैनिक गांव में भेज कर तबाही मचाई थी। सेनानियों को संबोधित करने के लिए जवाहरलाल नेहरू भी फीना आए थे। फीना के बलकरन सिंह तथा परवीन सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन के सिलसिले में अपने प्राणों का बलिदान किया। फीना के पुलिस इंस्पेक्टर हरिराज सिंह ने बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान अपने प्राणों का बलिदान किया।
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शिक्षा में फीना अग्रणी रहा है
अंग्रेजी काल में भी यहां प्राथमिक विद्यालय खुल गया था। एक अंग्रेजीकालीन कन्या पाठशाला भी यहां थी। बालिकाओं के लिए खेम सिंह इंटर कॉलेज संचालित है। इस संस्था की स्थापना भी अंग्रेजी कालीन है। फीना के सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज फीना ने हजारों लोगों को शिक्षित कर सफल बनाया। वर्तमान में श्री हरिपाल शास्त्री स्मृति महाविद्यालय क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।
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