बिजनाैर। यदि नरक होता है तो शहर की बकली कॉलोनी में रहने वाले 20 से ज्यादा परिवार उससे भी बुरे हालात में जी रहे हैं। 20 साल पहले तालाब पर माफिया ने कब्जा कर लिया। इससे जल निकासी बंद हो गई और मकानों में पानी भरने लगा।
सौ से ज्यादा शिकायतें भी अफसरों के मन को झकझोर नहीं पाई और एक-एक कर 15 से ज्यादा मकान कीचड़ और पानी में दफन हो गए। दो नालों के बीच जो मकान बचे हैं, लोग उनकी छत पर सारा सामान लेकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। कुछ दिन पहले वहां के एक व्यक्ति ने बेटी का रिश्ता तय किया, लेकिन जब लड़के वालों ने घरों की हालत देखी तो रिश्ता टूट गया।
शहर कोतवाली से चांदपुर को जाने वाली रोड पर पेट्रोल पंप के सामने से एक रास्ता बकली के लिए गया है। आगे बढ़ते समय लगता है मानों किसी पॉश कॉलोनी की ओर बढ़ रहे हैं। रास्ते में रेलवे फाटक पार करते हुए बकली में चमचमाती सड़क से जुडी छोटी सी गली में एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे देख अंदाजा ही नहीं होगा कि किसी शहर में है। गांवों के हालात भी यहां से बेहतर हैं।
जहां 15 से 20 साल पहले घर होते थे, वहां दस से 15 फीट कीचड़, पानी और 20 फिट ऊंचा फटेरा खड़ा है। दो नालों के बीच एक मकान की छत दिखाई दे रही है, जिस तक पहुंचने के लिए पांच बांस को जोड़कर पगडंडी बनाई गई है।
उस छत पर रहने वाला परिवार सांप, बिच्छू के डर के बीच यहीं से जाता है और इसी पगडंडी के सहारे दूसरे मकान की छत पर रह रहे अपने भाई तक पहुंचता है। इसके आसपास बने घरों के अंदर पानी भर चुका है और लोग अपना सारा सामान छतों पर रखे हुए हैं। पांच साल पहले यह क्षेत्र नगर पालिका में शामिल हो चुका है, लेकिन इन परिवारों पर किसी अफसर की नजर तक नहीं पड़ी।
बिजनौर के मोहल्ला बकली में जलभराव और गंदगी में डूबा मकान, छत पर झोंपड़ी बनाकर रह रहा परिवार। सं