दिसंबर शुरू हो गया है और पारा लगातार गिर रहा है। ऐसे में सरकारी गोशालाओं में गोवंश को ठंड से बचाने के लिए पत्ती, पराली बिछाई जा रही है तो कहीं हैलोजन लाइट लगाकर गर्मी करने के इंतजाम किए जा रहे हैं। जनपद की सबसे बड़ी छाछरी मोड़ के जंगल में बनी गोशाला की बहुत खराब हालत है। इन पशुओं के नीचे बिछाने के लिए न पर्याप्त पत्ती है और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उन्हें उढ़ाने वाली झूल की व्यवस्था तो कहीं नहीं हैं। छाछरी मोड़ की पशुशाला में भोजन के लिए बनी चर भी कम हैं। पशु ज्यादा। पेट भरने के लिए ये आपस में लड़कर घायल हो रहे हैं। इन पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की भी व्यवस्था नजर नहीं आई।
गोशाला में 450 गोवंश, भरपेट नहीं मिल रहा चारा
हीमपुर दीपा। थानाक्षेत्र के छाछरी मोड़ के जंगलों में बनी गोशाला में 450 गोवंश हैं। इतने पशुओं के लिए यहां न ठंड से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था है, न चारे की। कुछ पशुओं के लिए ही कपड़े टांगे गए हैं बाकी तो शेड में ऐसे ही खड़े रहते हैं। पशुओं को ठंड से बचाव को ओढ़ाई जाने वाली झूल कहीं नजर नहीं आई।
दिसंबर में बढ़ी ठंड के चलते पशुओं के नीचे पड़ी पत्ती की मात्रा भी कम है। गोवंश की संख्या अधिक होने के कारण गोवंश ठीक से नहीं बैठ पा रहे हैं। उनके चारा खाने को बनी चर कम पड़ रही हैं। चारा खाने को लेकर आपस में लड़ झगड़ कर घायल हो रहे हैं। गोशाला पर कुछ गोवंश गंभीर अवस्था में पड़े मिले ।इसके बारे में वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया की आपस में लड़ कर घायल हो गए हैं।
गोशाला पर मौजूद जलीलपुर पशु अस्पताल के चतुर्थ कर्मचारी करणवीर ने बताया कि इन पशुओं का शीघ्र ही उपचार कराया जाएगा। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए ठीक से देख रेख की जा रही है। गोशाला में पशुओं को चारे में भूसा व अगोले दिए जा रहे हैं जो प्रर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे। कर्मचारियों का कहना है कि किसानों के यहां गन्ने की छिलाई कम होने के कारण अंगोला व पत्ती कम मिल रही है।
हैलोजन लाइट से दी जा रही है गर्मी
बिजनौर। जिले में कई सरकारी गोशालाएं संचालित हैं। यहां पर गोशालों की सेवा के लिए कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। बिजनौर नगर पालिका द्वारा प्रदर्शनी मैदान में बनाई गई कान्हा गोशाला में 100 से ज्यादा गोवंश हैं। शहर के पास होने की वजह से यहां पर ज्यादा पराली व पत्ती का इंतजाम नहीं हो पाता। पराली का प्रयोग भी पशुओं के चारे के रूप में किया जा रहा है। रात को पराली बिछाई जाती है और सुबह को वह सूखने के लिए धूप में डाली जाती है। शाम को फिर इसी पराली का प्रयोग किया जाता है। गोशाला को ठंड में राहत देने के लिए कान्हा आश्रय स्थल में हैलोजन लाइट लगाई गई हैं। इनसे काफी गर्मी निकलती है। हवा से बचाव को तिरपाल लगाए गए हैं। गोवंश को ठंड से बचाने के लिए हैलोजन लाइट बहुत काम की साबित हो रही हैं। इसके अलावा किसानों से भी गोशाला को पत्ती दान करने के लिए अपील की जा रही है।
धनराशि नहीं मिलने से लटका गोशाला का निर्माण
अफजलगढ़। नगर स्थित गोशाला का निर्माण महीनों बाद भी पूरा नहीं हुआ है। हालांकि अस्थाई गोशाला में सर्दी के निपटने के पुख्ता इंतजाम हैं।
करीब दो करोड़ की लागत से मोहल्ला किला में कान्हा गोशाला का निर्माण शासन द्वारा धनराशि अवमुक्त न होने से अधर में लटका है। गांव अगवानपुर में करीब सवा करोड़ की लागत से बनी गोशाला का विभागीय औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका है। नगर पालिका द्वारा स्थापित अस्थाई गोशाला में आधा दर्जन पशु मौजूद हैं। शेड के चारों ओर तिरपाल लगा है। कुछ झूल भी रखी दिखाईं दी।
नगर पालिका ईओ कौशल कुमार ने बताया कि नगर में घूम रहे छह गोवंशीय पशुओं को अस्थाई गोशाला में रखा गया है। उनके चारे व पानी सहित सर्दी से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। पशुओं के नीचे पराली, पत्ती डाली जा रही है। पशु चिकित्सक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव अगवानपुर स्थित गोशाला निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पशुपालन विभाग को स्थानांतरित कर दी गई है। लेकिन विभागीय औपचारिकता पूरी न होने के कारण गोशाला का संचालन शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शीघ्र ही गोशाला का संचालन शुरू हो जाएगा।
उचित देखभाल के दिए निर्देश
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह के अनुसार सभी नगर पालिका, पंचायतों व जिला पंचायत से गौवंश की उचित देखभाल करने के लिए कहा गया है। गौवंश के नीचे पत्ती, पराली आदि डलवाई जा रही है। हाईलोलन लाइट भी लगवाई गई हैं।