बिजनौर। बिजनौर बैराज के तटबंध से अब गंगा की धारा सीधे नहीं टकराएगी। दरअसल धारा को सीधा और नियंत्रण में रखने के लिए सात किलोमीटर लंबा जल मार्ग तैयार किया गया है, जिसमें ड्रेजिंग का 95 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। तटबंध की तरफ पानी तेजी से नहीं आने पाए, इसके लिए एक किलोमीटर की लंबी 195 जियो ट्यूब भी लगा दी गई हैं। उधर तटबंध को पक्का करने का काम भी चल रहा है।
2025 के सितंबर में गंगा में उफान आया तो धारा ने रुख बदलते हुए तटबंध को काट डाला था। करीब एक किलोमीटर की लंबाई में तटबंध से सीधे पानी टकराता रहा। तटबंध को टूटता देख सिंचाई विभाग ही नहीं बल्कि प्रशासन घबरा गया। उस वक्त महीने भर तक इस तटबंध पर काम चला और आखिरकार तटबंध को टूटने से बचा लिया गया था। उस वक्त मगर कटान के साथ-साथ चल रहे राहत कार्य के चलते धारा तटबंध की सीमा को लांघ नहीं सकी थी।
अब आने वाली बरसात से पहले तटबंध की मजबूती के साथ गंगा में ड्रेजिंग करते हुए सिल्ट साफ की जा रही है। ड्रेजिंग मशीन से 60 मीटर चौड़ी और जलस्तर से तीन मीटर गहरी नहरनुमा जलमार्ग तैयार किया गया है। इससे गंगा के पानी को गहराई में बहने की जगह मिलेगी ताकि बाढ़ की स्थिति में गंगा की धारा का फैलाव नहीं होने पाए और तटबंध को भी पानी की टक्कर नहीं लगेगी। ड्रेजिंग करते हुए पानी के बहाव का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
सीमेंट और कंक्रीट से मजबूत हो रहा तटबंध
बिजनौर बैराज का तटबंध रावली से लेकर बैराज तक 11 किलोमीटर लंबा है। इसमें सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी में ही तटबंध कटान की जद में आया था। पहले यह तटबंध कच्चा था, अंदर की तरफ सिर्फ पत्थर ही लगे हुए थे। अब उसी हिस्से को एसीबीएम तकनीक से मजबूत बनाया जा रहा है। इसमें सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल हो रहा है।
सिल्ट हटाने के लिए ड्रेजिंग का 95 फीसदी काम पूरा हो गया है। पानी अपना रुख नहीं बदल सके, इसके लिए 195 जियो ट्यूब भी लगाई हैं। दो-चार दिन में ही काम पूरा कर लिया जाएगा। ...प्रणव, अधिशासी अभियंता, बैराज यांत्रिक अनुरक्षण खंड, कानपुर