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Bijnor News: बिजनौर की माटी में महक रही धान की पीबी 1985 की खुशबू

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बिजनौर। जनपद की माटी में धान की नई प्रजाति पीबी 1985 की खुशबू महक रही है। बासमती धान की पीबी 1985 प्रजाति एक नई और अनोखी किस्म है। यह प्रजाति कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने वाली है, जो जलवायु परिवर्तन और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली प्रजाति है।
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गन्ना और गेहूं फसल के उपरांत जिले में तीसरे नंबर पर धान की रोपाई, बुवाई होती है। जिले में धान का क्षेत्रफल करीब सवा लाख हेक्टेयर रहता है। धान की काफी प्रजाति पुरानी रहती और कुछ नई आती है। इसी क्रम में पहली बार बासमती धान की पीबी 1985 प्रजाति सरकारी फार्म में करीब 48 बीघा क्षेत्रफल में बीज के लिए तैयार हो रही है। अगले सीजन में किसानों को वितरण की जाएगी।

धान की पीबी 1985 प्रजाति की विशेषताएं
- यह प्रजाति कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है, जिससे किसानों को पानी की कमी की समस्या से निपटने में मदद मिलती है।
-डीएसआर विधि से इस प्रजाति की सीधी बुवाई करने से पानी और श्रम की बचत होती है, जो किसानों के लिए एक बड़ा फायदा है।
- यह प्रजाति खरपतवार नाशकों के प्रति सहनशील है, जिससे किसानों को खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है।
-पीबी 1985 प्रजाति बासमती धान अनोखे स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती है।
इस विधि से हुई प्रजाति की बुवाई, खर्च भी कम
इस नई प्रजाति की डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) विधि में बुवाई हुई है। इस विधि से धान के बीजों को सीधे नर्सरी में पौध तैयार करके रोपने के बजाए सीधे खेत में बोया जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है। इसमें नर्सरी तैयार करने, मजदूरों द्वारा रोपाई करने में लगने वाले समय और लागत की बचत होती है। इस विधि से कृषि विभाग के अधिकारियों की निगरानी में कुछ किसानों ने कई अन्य प्रजातियों की बुवाई की है।
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पीबी 1985 की पहली बार बुवाई हुई है। यह खाने व पैदावार में अच्छी प्रजाति है। खर्च भी कम है। वर्तमान में सरकारी फार्म में अच्छी खड़ी है। रोग भी नहीं है। अगले सीजन में किसानों को इसका बीज दिया जाएगा।
-जसवीर सिंह तेवतिया जिला कृषि अधिकारी

कम पानी में होने वाली इन नई प्रजाति उत्पादन में भी अच्छी है। डीएसआर विधि से बुवाई करने पर श्रम लागत बहुत कम आती है। कम लागत में अधिक उत्पादन वाली प्रजाति है। खुशबू भी बहुत अच्छी है।
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-डॉ. केके सिंह वैज्ञानिक नगीना अनुसंधान केंद्र
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