दो साल पहले हुए थे ब्याज देने के आदेश
केन कमिश्नर ने 25 मार्च 2019 को गन्ना भुगतान पर ब्याज देने के आदेश दिए हैं, जिसे किसान लेकर रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि एमएसपी था है और रहेगा, लेकिन इस पर खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने को तैयार नहीं हैं। अगर कोई उद्योगपति किसी फसल का भंडारण कर लेगा तो अगले साल व किसान से मनमाने दाम पर फसल खरीदेगा। चुटकी लेते हुए कहा कि वे किसी के साथ अलग बैठकर बात नहीं करते हैं। अगर ऐसा करते तो उन्हें भी दो गार्ड मिल जाते। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अफसर आंकड़ों में भुगतान का हवाला देकर किसानों को ठग रहे हैं। बिलाई चीनी मिल किसानों का पैसा सालों से समय पर नहीं दे रही। महापंचायत की अध्यक्षता भीम सिंह, संचालन वेदप्रकाश सिंह ने किया। इस दौरान पश्चिमी यूपी महासचिव कैलाश लांबा, अंकुर चौधरी, गौरव कुमार, राजपाल भगत, ओमराज राठी, मनीष, विजेंद्र, भूपेंद्र राठी, कपिल राणा, राकेश आदि मौजूद रहे।
बकाया से ज्यादा अटका है ब्याज
सरदार वीएम सिंह ने कहा कि बिजनौर के गन्ने के बकाया से ज्यादा तो किसानों का ब्याज बकाया। चीनी मिलों को नियम के अनुसार किसानों को पिछले 12 सालों का ब्याज देना है। यह जिले में कम से कम 600 करोड़ बनता है। ब्याज मिलेगा तो किसान के हर घर में पैसा जाएगा। किसान को ये पैसा मिल मालिकों पर किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना है। ये पैसा तभी मिलेगा जब किसान लखनऊ जाकर आवाज उठाएंगे।
आरसी काटने पर लगाई जाए रोक
किसानों के बीच एसडीएम विक्रमादित्य सिंह मलिक, डीसीओ यशपाल सिंह व सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता मिल अफसरों के साथ बात करने पहुंचे। सरदार वीएम सिंह ने उनसे कहा कि ब्याज सहित गन्ना भुगतान न होने तक किसानों की आरसी न काटी जाए और किसानों को उसके गन्ने पर मिलने वाला ब्याज बताया जाए। कहा कि भुगतान न मिलने तक आरसी काटने पर कोर्ट ने भी रोक लगा रखी है। डीसीओ यशपाल सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों का 600 करोड़ का ब्याज बकाया है। बिलाई मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह ने पांच करोड़ का भुगतान करने की बात कही तो किसानों ने इसे लेने से मना कर दिया।