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हादसे को न्योता दे रहे स्कूलों के जर्जर भवन

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बिजनौर में चंदपुरा कॉलोनी का विद्यालय का भवन हुआ खस्ताहाल। - फोटो : BIJNOR
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हादसे को न्योता दे रहे स्कूलों के जर्जर भवन
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बिजनौर। शासन भले ही विद्यालय के सुंदरीकरण का दावा करे, लेकिन जिले में स्कूलों के जर्जर भवन शिक्षकों व छात्रों के लिए खतरा बने हुए हैं। जिले के 414 स्कूलों के भवन जर्जर हैं। ये भवन किसी भी दिन बडे़ हादसे की वजह बन सकते हैं। इस बार भी शासन से जर्जर भवनों के निर्माण के लिए कोई धनराशि नहीं आने से शिक्षक मायूस हैं। स्कूलों के जर्जर भवनों में शिक्षक व छात्र जान हथेली पर रखकर बैठे रहते हैं।
जिले के परिषदीय प्राइमरी और उच्च प्राइमरी विद्यालय के बड़ी संख्या में भवन जर्जर होने से शिक्षकों के लिए खतरा बने हुए हैं। शिक्षकों ने कई बार जर्जर भवनों को गिराकर नए भवन बनवाने की मांग की। लेकिन शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। विकास क्षेत्र नजीबाबाद और नहटौर में सबसे अधिक 56-56 स्कूलों के भवन जर्जर हैं। विकास क्षेत्र बुढ़नपुर में 42, ब्लॉक हल्दौर में 48, किरतपुर में 24, अफजलगढ़ में 41, विकास क्षेत्र कोतवाली में 21, विकास क्षेत्र अल्हपुर में 26, विकास क्षेत्र जलीलपुर में 37, विकास क्षेत्र नूरपुर में 42 स्कूलों के भवन जर्जर हालत में हैं। जबकि विकास क्षेत्र मोहम्मदपुर देवमल में भी 12 स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है। नगर क्षेत्र नगीना के पांच, बिजनौर के चार स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है।
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कई स्कूलों की हालत ऐसी है कि लिंटर से प्लास्टर अपने आप टूट कर कभी भी गिर जाता है। यह भवन शिक्षकों के छात्रों की के लिए खतरा बने हुए हैं। कभी भी ये भरभरा कर गिर सकते हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग की माने तो जर्जर भवनों के निर्माण के लिए शासन को सूची भेजी जा चुकी है। लेकिन धनराशि नहीं आने के कारण भवनों का निर्माण नहीं हो पाया है। शिक्षकों ने भी कई बार बीएसए से मिलकर जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला महामंत्री दुष्यंत कुमार, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री प्रशांत सिंह ने बीएसए से जर्जर भवनों के लिए कार्रवाई करने की मांग की थी। दूसरी ओर प्राथमिक शिक्षक संघ के संयुक्त मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि जर्जर भवनों में शिक्षण कार्य कराते समय हादसे का डर बना रहता है। ऐसे भवनों का पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए।
शहर के आसपास के स्कूल भी है जर्जर हालत में
नगर क्षेत्र पुलिस लाइन का स्कूल भी जर्जर बना हुआ है। बिजनौर से ही लगे प्राइमरी स्कूल तिमारपुर का भवन भी जर्जर हालत में है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय तरीकमपुर रूपचंद, हेमराज कॉलोनी, प्राइमरी स्कूल चंदपुरा कॉलोनी सहित कई विद्यालय शहर के आसपास भी जर्जर हालत में बने हुए हैं। इनमें भी जान जोखिम में डालकर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
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शासन को भेजी जा चुकी है सूची : बीएसए
बीएसए महेश चंद के मुताबिक जिले के जर्जर भवनों की सूची विकास क्षेत्रवार तैयार कराई गई थी। जिन स्कूलों के भवन जर्जर हैं, विद्यालय के शिक्षकों से सूचनाएं मांगी गई थीं। जिले के 414 स्कूल जर्जर हालत में हैं। सभी जर्जर भवन सूचना शासन को भेजी जा चुकी है। शासन से भवनों के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत होते ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। दूसरी ओर जिला समन्वयक निर्माण सलीम अख्तर बेग के मुताबिक जर्जर भवनों वाले स्कूलों की सूचनाएं समय-समय पर शासन को भेजी जा रही हैं। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए भी जिन स्कूलों के भवनों का निर्माण होना है, उनकी सूची शासन को भेजी गई है।

बिजनौर के हेमराज कालोनी के प्राथमिक विद्यालय के भवन में आई दरार।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम तरीकमपुर रूपचंद के जूनियर हाई स्कूल की खस्ताहाल छत।- फोटो : BIJNOR

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