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Bijnor News: गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव से कटान और बाढ़ का खतरा बरकरार

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बालावाली के पास कटान करती गंगा। संवाद
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- बालावाली में बीते दस दिनों से ट्रैक को कटान बचाने की जद्दोजहद में जुटा है रेलवे
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंदक/बिजनौर। पहाड़ पर हो रही बारिश से गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव जारी है। ऐसे में बिजनौर के बालावाली और आस पास में जमीनों के कटान का खतरा बरकरार बना हुआ है। रेलवे की ओर से जम्मूतवी कोलकाता रेल ट्रैक को कटान से जद में आने से बचाने के लिए बीते दस दिनों से काम चल रहा है। हालांकि अब रेलवे ने गंगा की धारा के मुहाने पर स्लीपर, पत्थर और मिट्टी के कट्टे लगाने का काम तेज कर दिया है।
बिजनौर की सीमा से ही गंगा मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। मगर जिले की धरती पर गंगा की धारा अलग अलग रुप दिखाती है। बालावाली से लेकर बिजनौर बैराज तक गंगा की धारा जमीनों का कटान करती है जबकि जलीलपुर के इलाके में पहुंचते ही बाढ़ का रुप धारण कर लेती है।
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बालावाली की बात करें तो यहां करीब एक महीना पहले से गंगा की धारा जमीनों का कटान कर रही है। इंडियन ऑयल की पाइप लाइन भी इसी कटान की वजह से टूटी। साथ ही हजारों बीघा जमीन गंगा में समा गई। बालावाली रेल पुल के पास गंगा की धारा ने तेजी से कटान करते हुए रेल ट्रैक की ओर से रुख कर लिया था। ऐसे में रेल ट्रैक को बचाने की जद्दोजहद में रेलवे दस दिनों से लगा है। ट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए युद्ध स्तर पर स्लीपर, पत्थर और हजारों की संख्या मे मिट्टी के कट्टे गंगा की तेज धार को मोड़ने के लिए लगाए जा रहे है।

बिजनौर बैराज के जलस्तर पर एक नजर
शनिवार की सुबह चार बजे बिजनौर बैराज पर जलस्तर 219.40 मीटर रहा जबकि पानी 218127 क्यूसेक बहता रहा। सुबह आठ बजे जलस्तर 219.30 और पानी 181701 क्यूसेक तथा शाम चार बजे जलस्तर 219.20 और पानी 134709 क्यूसेक छोड़ा गया। उधर शुक्रवार की शाम जलस्तर 219.20 और पानी 138509 क्यूसेक था।

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फिर बढ़ा जलस्तर, सहमे गांव वासियों ने की तटबंध की मांग

25 दिन से बाढ़ के हालात में काट रहे हैं जिंदगी
फोटो-
जलीलपुर। शनिवार की सुबह बाढ़ प्रभावित गांव वासियों के लिए बहुत सुखद थी। दत्तियाना रोड पर पानी की बूंद नहीं थी, अन्य गांवों के रास्तों पर भी बहुत कम पानी था। गंगा में जल-प्रवाह बढ़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फिर से पानी बढ़ने लगा है। बढ़ते जलस्तर को देख गांव वासियों को चिंता सताने लगी है। गांव वासियों ने गंगा पर तटबंध बनवाने की मांग की है।
जलीलपुर क्षेत्र में गंगा के निकटवर्ती गांवों में 25 दिन से बाढ़ के हालात हैं। दो दिनों की राहत के बाद शनिवार को फिर से बाढ़ प्रभावित गांवों के रास्तों पर पानी बढ़ने लगा है। लंबे समय से बाढ़ की मार झेल रहे गांव वासियों को भविष्य की चिंता रही है।
गांव दत्तियाना निवासी बजुर्ग उमेश कुमार त्यागी ने बताया पहले बाढ़ का पानी लंबे समय नहीं रूकता था। एक दो दिन में राहत मिल जाती थी। लंबे समय से फसलों में पानी भरा है, जिस कारण 70 से 100 प्रतिशत तक फसलों में नुकसान है। प्रभावित गांव वासियों को तुरंत नुकसान अनुसार मुआवजा दिया जाए। गंगा पर तटबंध जल्दी बनवाया जाए।
गांव रायपुर खादर निवासी करतार सिंह ने बताया कि उनके गांव में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का इंधन, अनाज, कपड़े, पशुओं का भूसा आदि नष्ट हो गए हैं। झाड़ी मजदूर बाढ़ के चलते गांव के बाहर काम पर नहीं जा रहे हैं। सरकार को तुंरत मदद करनी चाहिए। तटबंध का निर्माण तुरंत शुरू कराना चाहिए।
गांव मीरापुर सीकरी किसान स्वर्ण सिंह लाडी ने बताया आज फिर करीब एक फीट पानी बढ़ गया है। 25 दिन से पानी के बीच जिंदगी काट रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल बना है। हम व हमारी अगली पीढ़ी बिना तटबंध के खेती नहीं कर पाएगी। सरकार को जल्द से जल्द तटबंध बनवाना चाहिए।
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गांव जलालपुर खादर के किसान हरस्वरूप सिंह ने कहा बिना तटबंध के हमारा जीवन मुश्किल हो जाएगा। बाढ़ प्रभावित गांव वासी कर्ज में डूब रहे हैं। फसले आंखों के सामने बर्बाद हो रही है। सरकार को तटबंध बनाना चाहिए।

बालावाली के पास कटान करती गंगा। संवाद

बालावाली के पास कटान करती गंगा। संवाद

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