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प्रेमधाम से छंटने लगे संकट के बादल

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प्रेमधाम से छंटने लगे संकट के बादल
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नजीबाबाद। मानवीय सेवा को धर्म मानने वाली मिशनरी टीम ने प्रेमधाम आश्रम के दिव्यांगों और अनाथों को कोरोना संकट से उबारने के साथ स्वयं कोरोना पर जंग जीती। अब स्वयंसेवी प्रशासन की सूचना पर संक्रमित परिवारों को सैनिटाइज करा रहे हैं।
प्रेमधाम आश्रम में अप्रैल माह में एक समय ऐसा आया जब स्वयं आश्रम के संचालक और बड़ी संख्या में दिव्यांग कोरोना संक्रमित हो गए। फादर बेनी तकेकरा, फादर शिबु थॉमस, सिस्टर एनमेरिया सहित 10 से अधिक आश्रम सेवक और दिव्यांग संक्रमित हो गए। इन आश्रम संचालकों पर दिव्यांग और अनाथों को नहलाने-धुलाने, उनके कपड़े धोने, खाना बनाने, हाथों से खाना खिलाने और समस्त दिनचर्या के कार्यों को निवृत कराने की जिम्मेदारी थी। प्रेमधाम आश्रम परिवार के करीब 60 से 70 सदस्यों के संक्रमित होने से मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो। लेकिन आश्रम के मिशनरी स्वयंसेवकों खास तौर पर फादर शिबु थॉमस और फादर बेनी तकेकरा ने हिम्मत नहीं हारी।
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इंसानी रिश्ते को धैर्य, समर्पण भावना और लगन के साथ पूरा कर कोरोना पर जंग जीती। एक नहीं आश्रम के अनेक दिव्यांगों का जीवन बचाने के साथ फादर शिबु थॉमस और फादर बेनी तकेकरा की टीम ने कोरोना को मात दी। समाजसेवियों ने मुसीबत के समय आश्रम तक फल पहुंचाए। संक्रमण से एक माह पूर्व आश्रम सेवक राजीव शर्मा की मृत्यु से शोकाकुल प्रेमधाम आश्रम परिवार ने सिस्टर सुशीला, सिस्टर डेसी, सिस्टर एनमेरिया, प्रदीप, विजय, जितेंद्र, सुशील दानियाल, मंजू शर्मा, जय कुमार आदि स्वयंसेवकों की मदद से कोरोना पर जंग जीती।
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फलाहार और पौष्टिक भोजन से बढ़ाई इम्युनिटी
नजीबाबाद। प्रेमधाम आश्रम पर संक्रमण के बादल छाने के बाद मिशनरी सेवकों ने आहार के रूप में फलाहार, मशरूम, पनीर और स्वादिष्ट भोजन स्वयं और संक्रमितों को सेवन कराने का फैसला लिया। स्वयं भोजन आदि बनाने वाले मिशनरी सदस्यों को संकट के दौर में भोजन बनाने के लिए बाहरी कारीगर की भी मदद ली।
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