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Bijnor News: तातारपुर एवं ननुपुरा गोशाला में गोवंशों को दो दिन से नहीं मिला हरा कटा चारा

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- ननुपुरा जट की गोशाला में खुले में पड़ा भूसा, नहीं की गई पुख्ता व्यवस्था
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- संरक्षित पशुओं के लिए बोया गया हरा चारा पानी के अभाव में सूख रहा

संवाद न्यूज एजेंसी

हीमपुर दीपा/छाछरी मोड़। गांव ननुपुरा जट और माड़ी के मौजा ततारपुर में संरक्षित गोवंशों को दो दिन से हरा कटा हुआ चारा नहीं मिला है। शनिवार को अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान गोशाला में हरा चारा मंगाया गया था लेकिन यह दो दिन से यूं ही पड़ा हुआ है। इसे काटकर पशुओं की चर तक नहीं पहुंचाया गया है।

ननुपुरा जट के जंगल में आठ बीघा भूमि में चार वर्षों से अस्थाई गोशाला संचालित है। ग्राम पंचायत के माध्यम से संचालित इस गोशाला में 172 गोवंश हैं। शनिवार को निरीक्षण करने पहुंची एसडीएम सदर रितु रानी को चिकित्सकों ने 148 गोवंश होने की जानकारी दी थी। जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। रविवार को अमर उजाला की टीम गोशालाओं में पहुंची तो दोनों जगह हरा चारा तो पड़ा मिला लेकिन वह पशुओं की चर तक नहीं पहुंचा।
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ननुपुरा जट की गोशाला के बाहरी हिस्से में गोवंश के लिए उपयोग में लाने वाला भूसा खुला पड़ा मिला। एक ग्रामीण ने बताया कि ननुपुरा जट की गोशाला में इकट्ठा किया गया गोबर बिजनौर के एक अधिकारी के बगीचे में खाद के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यहां गोबर गैस प्लांट की भी व्यवस्था नहीं है।
पशुओं को दफनाने के लिए खोदे गए हैं गड्ढे
दोनों गोशालाओं में मृत पशुओं को दफनाने के लिए गड्ढे खोदे गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बीते तीन माह में मुंह पका बीमारी से कई पशुओं की मौत हुई थी।

छोटी है बाउंड्रीवॉल, गुलदार का खतरा

ननुपुरा जट गोशाला की बाउंड्री वॉल बहुत छोटी है, जिसके चलते यहां गुलदार का खतरा रहता है। ग्राम प्रधान पारुल देवी ने बताया कि बाउंड्रीवाॅल को ऊंचा कराने के लिए कई बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। जबकि ततारपुर की गोशाला की तारबंदी जगह-जगह से टूटी हुई है। यहां अभी तक फेंसिंग कराने की आवश्यकता नहीं समझी गई। दोनों गोशालाओं में बिजली कनेक्शन नहीं हैं। इस तरफ भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पानी के अभाव में सूख गया चारा
ततारपुर की गोशाला में 200 गोवंशों के लिए चार टिन शेड हैं जो नाकाफी हैं। इसका भूखंड 72 बीघा है। यहां अनदेखी से आधे से अधिक भाग बंजर हो चुका है। कुछ भूखंड पर गोवंश के लिए हरा चारा बोया गया था लेकिन पानी के अभाव में चारा सूख रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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2024 से नहीं हुआ चारे का भुगतान
ननूपुरा जट के गोशाला संचालक को भूसे, हरे-चारे का भुगतान माह फरवरी 2024 से नहीं हो पाया। प्रधान के पति कार्मेंद्र सिंह का आरोप है कि संबंधित चिकित्सकों द्वारा इस बाबत अभी तक प्रस्ताव बनाकर नहीं भेजा गया है। गांव ननुपुरा जट निवासी डॉ. श्रीराज सिंह का कहना है कि गोवंश को संरक्षित करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत की है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस और तुरंत ध्यान दे। गांव माड़ी के प्रधान रामेश्वर सिंह का कहना है कि लगभग छह माह से गोशाला ततारपुर की जिम्मेदारी एनजीओ को दे दी गई है। जिला प्रशासन को अपनी देखरेख में यहां गोवंश को पानी, हरा चारा मानक के अनुरूप मिलना चाहिए। जबकि भीषण गर्मी के चलते गोवंश को दिन में एक बार स्नान कराना चाहिए। माड़ी निवासी कुलदीप चिकारा ने बताया कुछ लोग छुट्टा गोवंश को गांव में खुला छोड़ देते हैं, जिसके चलते गोवंश किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्हें जिला प्रशासन गोशाला में संरक्षित कराए।
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