किसान-मध्यम वर्ग और युवाओं के लिए उम्मीदें लेकर आया बजट
बिजनौर। केंद्र सरकार ने मंगलवार को आम बजट पेश किया। बजट पर सभी वर्गों की निगाहें टिकी हुई थीं। अब बजट में जैविक खेती और लागत में कमी लाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। हालांकि किसानों इससे भी ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे थे। किसानों ने बजट पर मिलीजुली प्रक्रिया दी है। वहीं युवाओं और व्यापारियों के लिए भी बजट उम्मीदें लेकर आया है। आयकर के स्लैब में बदलाव नहीं होने से करदाताओं ने राहत महसूस की है। संवाद
सीए बता रहे... मध्य वर्ग के लिए अच्छा है बजट
टैक्स स्लैब में बदलाव मध्य वर्ग के लिए फायदेमंद रहता। जीएसटी की शर्तों को आसान किया गया है। उनके अनुसार कॉरपोरेट टैक्स में राहत मिलने से उद्योग लगाने को बढ़ावा मिल सकता है। प्रॉपर्टी के काम से जुड़े और अपना घर आदि बेचने वालों को भी राहत मिलेगी।
- रचना विश्नोई, सीए
सेवा कर पर जीएसटी से बहुत राहत की उम्मीद कर रहे हैं। जिसे इस बजट में 18 से घटाकर 12 प्रतिशत किया जाना चाहिए था। पिछले 6-7 वर्षों में, कर दरों के स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, आय सीमा सीमा को 2.5 लाख के बजाय बढ़ाकर 5 लाख करने की आवश्यकता थी।
- चंचल चिकारा, चार्टेड एकाउंटेंट
क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वालों में बढ़ेगा रुझान
क्रिप्टो करेंसी से जुड़े डॉ. विदित कुमार के अनुसार क्रिप्टो करेंसी को मंजूरी मिलने से निवेशकों का रुझान इसकी ओर बढ़ेगा। जिन लोगों ने इसमें पैसा लगाया है उन्हें भी राहत मिलेगी।
लागत का मिलना चाहिए डेढ़ गुना दाम
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम मिलना चाहिए। सरकार की इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार को किसानों की सभी फसलों को खरीदने की घोषणा करनी चाहिए।
आयकर दाताओं को किया नजरअंदाज
व्यापारी नेता मनोज कुच्छल के अनुसार लॉक डाउन में हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद थी लेकिन कुछ नहीं मिला। व्यापारियों को लोन में छूट की भी कोई घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने व्यापारी वर्ग और आयकर दाताओं को एकदम नजरअंदाज कर दिया है।
बजट से हुई निराशा
व्यापारी सुशील जिंदल के अनुसार व्यापारी वर्ग कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान में था। सरकार ने इस वर्ग को उबारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। बजट से निराशा हुई है।
बचत करने वालों के लिए चले अलग योजना
कर्मचारी सवेंद्र कुमार के अनुसार टैक्स स्लैब में छूट मिलनी चाहिए। बचत करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग से कोई घोषणा होनी चाहिए थी। बजट में ऐसा नहीं होने से निराशा हाथ लगी है।
फसलों का मिलना चाहिए डेढ़ गुणा दाम
भाकियू के मंडल अध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार गंगा किनारे वन विभाग की जमीन पर माफियों का कब्जा है। सरकार को इस जमीन को मुक्त कराना चाहिए। सरकार को किसानों की फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम दिलाना चाहिए।
व्यापारी सुशील जिंदल- फोटो : BIJNOR
व्यापारी नेता मनोज कुच्छल।- फोटो : BIJNOR