प्रतिभाओं को निखार रहा बिजनौर बास्केट बॉल एसोसिएशन
बिजनौर। नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिछले करीब तीन साल से कोई बास्केट बॉल कोच नहीं होने से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। प्रशिक्षण के अभाव में खिलाड़ी चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाते। इस कारण बिजनौर की बास्केट बॉल प्रतिभाओं को हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल रहा है। लेकिन बिजनौर बास्केट बॉल एसोसिएशन जनपद की प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहा है। हर साल बिजनौर से चार टीमें स्टेट और नेशनल स्तर पर बिजनौर का प्रतिनिधित्व करती हैं।
बिजनौर की बास्केट बॉल प्रतिभाएं बिना कोच के प्रशिक्षण के अभाव में अपना हुनर नहीं निखार पा रही हैं। नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में जुलाई 2017 से बास्केट बॉल कोच नहीं है। 2017 में तत्कालीन क्रीड़ाधिकारी एवं बास्केट बॉल कोच डॉ. अतुल सिन्हा के स्थानांतरण के बाद किसी कोच की नियुक्ति नहीं हुई। प्रभारी उपक्रीड़ाधिकारी जयवीर सिंह का कहना है कि निदेशालय को रिक्त पद भरने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष खेल कैंपों का नवीनीकरण नहीं हो पाया। खेल कैंप का नवीनीकरण होने पर ही कोच के नियुक्ति हो पाएगी।
वहीं, जिला खेल कार्यालय से इतर बिजनौर बास्केट बॉल एसोसिएशन पिछले कई साल से जनपद के युवाओं को प्रतिभा दिखाने के मौके दे रहा है। एसोसिएशन की ओर से हर साल अंडर 13, अंडर 16, अंडर 18 और ओपन की चार टीमें स्टेट और नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जाती है। 1990 को स्थापना के बाद से एसोसिएशन के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीयस्तर पर बिजनौर को पहचान दिलाई है और कई मेडल भी दिलाए हैं। नेशनल स्तर के कई खिलाड़ी खेल कोटे से सरकारी नौकरियां भी पा चुके हैं। पूर्व बास्केट बॉल खिलाड़ी और एसोसिएशन के सचिव रूपेंद्र बाना ने बताया कि सुरजीत कुमार, भानू प्रताप, अक्षय चौधरी और अमन कुमार जैसे कई खिलाड़ी नेशनल खेलकर बिजनौर को मेडल और सम्मान दिला चुके हैं। सुरजीत और भानू खेल कोटे से सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए हैं और सेना की तरफ से खेलते हैं। अक्षय चौधरी दो वर्ष पहले ही रेल विभाग में भर्ती होकर डीएलडब्ल्यू की तरफ से खेल रहे हैं। वे खेलो इंडिया के लिए यूपी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अमन कुमार अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में बास्केट बॉल कोच हैं। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन के सीनियर खिलाड़ी अपने जूनियर को प्रशिक्षण देते हैं। अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए बाहर भी भेजा जाता है।