- करीब दो सालों से पुल से गुजर रहा है ट्रैफिक
- बिजनौर की सीमा में पहुंच मार्ग बनाने के लिए नहीं थी सरकारी जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बालावाली में गंगा नदी पर पुल बनकर तैयार, पिछले दो सालों से ट्रैफिक भी गुजर रहा है। मगर अभी तक पहुंच मार्ग को पक्का नहीं किया जा सका है। ऐसे में यातायात पथरीली राह से गुजरने को मजबूर है।
दरअसल बिजनौर की सीमा में 400 मीटर लंबे पहुंच मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है। मामला सड़क बनाने के लिए जमीन को लेकर अटका हुआ है। बिजनौर को उत्तराखंड के लक्सर और रुड़की से सीधे जोड़ने के लिए साल 2016 में बालावाली में गंगा नदी पर 42 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण चालू हुआ था। बाद में पुल निर्माण की लागत बढ़कर 62 करोड़ हो गई। पिछले दो सालों से यह पुल बनकर तैयार है। इस पुल से दोनों राज्यों का ट्रैफिक भी सरपट दौड़ रहा है। बता दें कि जब पुल का प्रस्ताव भेजा गया था तो दोनों ओर सड़क से जोड़ने के लिए सरकारी जमीन होने का दावा किया गया था। बाद में जब पहुंच मार्ग निर्माण की बात आई तो सरकारी जमीन नहीं मिली। बालावाली पुल को सड़क से जोड़ने के लिए 1200 मीटर लंबा पहुंच मार्ग बनाया जाना है, इसमें 400 मीटर लंबी सड़क सरकारी नहीं है। हालांकि मौके पर संकरी सड़क बनी है, जोकि अभिलेखों में एक उद्योगपति की बताई जा रही है। सड़क की इस जमीन को अधिग्रहण करने की कवायद चली। हालांकि अब मामला कोर्ट में जा पहुंचा है।
- पहुंच मार्ग का पक्का होना बाकी
यूं तो पुल को सड़क से जोड़ा गया है लेकिन यह सड़क अभी डामर की नहीं बनी है। मिट्टी और पत्थर डालकर वाहनों के निकलने के लिए रास्ता बनाया जा चुका है। इसके साथ ही पुल के पास स्थित फैक्टरी के बीच होकर निकल रही सड़क को सीधा और चौड़ा किया जाना है। ऐसे में वाहन संकरी सड़क से निकलकर पुल के पास वाली कच्ची सड़क से होते हुए निकल रहे हैं।
- 50 किलोमीटर की दूरी हुई है कम
पंजाब और हरियाणा की ओर से नैनीताल या मुरादाबाद की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को हरिद्वार से आकर वाया नजीबाबाद से होकर निकलना पड़ता है। हरिद्वार से निकलने में पचास किमी की अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। पुल के चालू होने के बाद ट्रैफिक सहारनपुर से रुड़की और रुड़की से सीधे बालावाली होकर बिजनौर में प्रवेश कर रहा है। जिससे हरिद्वार नहीं जाना पड़ रहा।
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बालावाली में पुल के पास सड़क निर्माण के लिए प्रक्रिया चली थी। हालांकि अब जमीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जल्द ही इसमें समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। - अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व