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शिकायत पर टीम ने पकड़ी घटतौली

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शिकायत पर टीम ने पकड़ी घटतौली
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बिजनौर। शासन के निर्देश पर की गई तौल कांटों की जांच में गन्ना खरीद केंद्रों पर घटतौली पकड़ी गई है। घटतौली तौल कांटों के साफ्टवेयर में हेराफेरी करके की जा रही थी। मामले में तौल लिपिक का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है।
जिले में नौ चीनी मिलें हैं। चीनी मिलों के 500 से अधिक गन्ना खरीद केंद्र संचालित हैं। सभी सेंटरों पर इलेक्ट्रानिक तौल कांटे लगे हैं। गन्ना पेराई सीजन नवंबर में शुरू हुआ था। किसान विभिन्न मंचों से सेंटरों पर घटतौली होने के आरोप लगाते रहे हैं। किसान दिवस में कई बार घटतौली का मामला उठा है। अधिकारियों द्वारा बार-बार घटतौली रोकने का आश्वासन दिया गया। पेराई सीजन के तीन माह बाद भी घटतौली रोकने को लेकर कुछ नहीं हुआ। इस पर नजीबाबाद क्षेत्र के ग्राम धनसली के किसान देवेंद्र सिंह ने घटतौली की शिकायत राज्य कंट्रोल रूम को भेजी। शिकायत में आरोप लगाया है कि तौल लिपिक घटतौली कर रहा है। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार तीन फरवरी की शाम दफ्तर को राज्य कंट्रोल रूम से शिकायत मिली । जिस पर वह गन्ना समिति बिजनौर के सचिव संजीव भसीन के साथ धनसली गन्ना सेंटर जांच के लिए पहुंचे। सेंटर नजीबाबाद चीनी मिल का है। सेंटर पर किसान सुरेंद्र सिंह की गन्ने से भरी गाड़ी तुल चुकी थी। गाड़ी को दुबारा तुलवाया गया। गाड़ी का वजन 30 क्विंटल 85 किलोग्राम था, जबकि तौल लिपिक ने किसान की पर्चा पर वजन 30 क्विंटल 65 किलोग्राम लिखा था। इस प्रकार 20 किलोग्राम वजन कम लिखा था। तौल लिपिक कम वजन लिखने का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद धामपुर चीनी मिल के पथरा सेंटर के कांटे की जांच की गई। एक किसान की गन्ना भरी गाड़ी का वजन 26 क्विंटल 55 किलोग्राम था। वजन की पुष्टि के लिए गाड़ी को पास के ही दो धर्म कांटों पर तुलवाया गया। गाड़ी का वजन क्रमश: 27 क्विंटल 35 किलोग्राम तथा 27 क्विंटल 25 किलोग्राम निकला। इस प्रकार वजन में 70 व 80 किलोग्राम का अंतर मिला है। मौर्य ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों के सॉफ्टवेयर की जांच के लिए डीएम को पत्र भेजा गया है।
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तौल कांटों की जांच पर बनी है टीम
बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय ने तौल कांटों की जांच के लिए तहसील एसडीएम की अध्यक्षता में टीम बना रखी है। टीम में गन्ना व बांट माप अधिकारी शामिल हैं। डीएम के हर टीम को माह में कम से कम चार कांटों की जांच करने के निर्देश हैं। जांच में दूरस्थ स्थित सेंटरों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
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