नगीना। भारत-अमेरिका के खराब होते व्यापारिक रिश्तों का असर नगीना के काष्ठ कला उद्योग पर पड़ता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा छेड़े गए टैरिफ वार की मार से नए ऑर्डर आने बंद हो गए हैं। हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों ने अब अमेरिका के अलावा दूसरे देशों और भारत के बड़े बाजारों में संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।
नगीना को काष्ठ कला के जरिए दुनिया भर में पहचान मिली हुई है। यहां लकड़ी पर शिल्पकारों द्वारा की जाने वाली नक्काशी की मांग देश से ज्यादा विदेश से आती है। सालाना 300 करोड़ रुपये से अधिक का लकड़ी से निर्मित सामान नगीना से विदेश में निर्यात होता है। खास बात यह है की नगीना से निर्यात होने वाले हैंडीक्राफ्ट के आइटम का आधे से अधिक कारोबार अमेरिका से ही है।
पिछले कई माह से टैरिफ वार के चलते जुलाई माह तक आने वाले करीब 50 करोड़ रुपये के नए आर्डर अभी भी रुके पड़े हैं। निर्यातकों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि अगस्त माह के अंत तक 50 प्रतिशत के टैरिफ की घोषणा अमेरिका द्वारा अमल में लाई जाती है तो निर्यात व्यापार की कमर पूरी तरह टूट जाएगी। इसे देखते हुए नगीना के हैंडीक्राफ्ट निर्यातक अब अन्य देशों के साथ स्थानीय बाजारों में अपने उत्पादों के लिए नए खरीदार ढूंढने में लग गए हैं।
निर्यातकों को इस बात का डर सता रहा है कि अमेरिका के नए टैरिफ प्लान से वस्तुएं महंगी होंगी, तथा निर्यात में काफी कमी आ सकती है। स्थानीय हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों ने अन्य देशों से भी संपर्क कर नए बाजार की तलाश शुरू कर दी है।
n 65 प्रतिशत निर्यात केवल अमेरिका को : नगीना के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट कारोबारी व स्टार इंडिया क्राफ्ट के स्वामी मोहम्मद नवाज का कहना है कि अमेरिकी बाजार से होने वाले नुकसान की पूर्ति अन्य देशों व स्थानीय बाजार से नहीं हो सकती है। उनका कहना है कि हैंडीक्राफ्ट का लगभग 65 प्रतिशत निर्यात कारोबार अकेले अमेरिका से होता है। इस नुकसान की पूर्ति के लिए कनाडा, जर्मनी व यूके के बाजार में व्यापार बढ़ाने का प्रयास शुरू किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने स्थानीय बाजार से कुछ ज्यादा संभावना की उम्मीद नहीं जताई है।
हैंडीक्राफ्ट कारोबारी आफताब मुल्तानी का कहना है कि अमेरिका को हिंदुस्तान के बाजार के साथ छेड़े गए टैरिफ वार से पीछे हटना पड़ेगा। यदि अमेरिका का बाजार हमारे लिए सुस्त पड़ता है तो इसकी पूर्ति के लिए रूस, इंग्लैंड, फ्रांस व अन्य देशों के बाजार में अपने व्यापार की गति को तेज करना पड़ेगा।