तालाबों की बदलेगी सूरत, जैव विविधता को दिया जाएगा बढ़ावा
बिजनौर। जिले के सभी तालाबों की अब कायापलट की जाएगी। तालाबों से प्रदूषण को खत्म किया जाएगा। तालाबों की पानी सोखने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। हरियाली के लिए पेड़ लगाए जाएंगे। बड़े तालाबों में पानी को ट्रीट किया जाएगा। भविष्य में इन तालाबों को वेटलैंड या बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए तालाबों के पानी की जांच होगी। कई विभाग तालाबों की कायापलट का काम करेंगे।
तालाब भूमिगत जल को प्राकृतिक रूप से रिचार्ज करते हैं। लेकिन तालाबों की भी हालत खराब रहती है। तालाब या तो खरपतवार आदि से भरे रहते हैं या फिर उनकी गहराई कम होती है। ऐसे में तालाबों में कम ही पानी आ पाता है। कई जगह तालाबों में पानी इतना गंदा होता है कि वहां पर दुर्गंध आती है। गंदगी की वजह से पक्षियों का जमावड़ा भी नहीं लग पाता है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण ने भूगर्भ में शुद्ध जल भेजने के लिए इन तालाबों की सुध लेने का निर्णय लिया है। अब इन तालाबों की पूरी सूरत बदली जाएगी। शासन इसके लिए अभियान शुरू कर रहा है। इसके अंतर्गत सभी तालाबों के पानी की जांच की जा रही है। देखा जाएगा कि तालाब के पानी की गुणवत्ता कैैसी है। तालाब की जगह कितनी है और कितने पर कब्जा है। तालाब की जमीन कितनी गहरी है। इसमें वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, जिला पंचायत राज विभाग इस काम में लगेंगे।
प्रदूषण खत्म करने वाले पौधे लगेंगे
वन विभाग के एसडीओ हरि सिंह के अनुसार तालाबों का पानी अगर गंदा होगा और तालाब बड़ा है तो वहां पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। ऐसे पौधे भी लगाए जाएंगे जो पानी के हैवी मैटल्स को निष्क्रिय कर देते हैं। इनमें प्रमुख रूप से वाटर लिली, पटेरा, हाइड्रा आदि पौधे शामिल हैं। इनकी घनी जड़ हैवी मैटल्स को छान देती हैं। पानी में मच्छरों के लार्वा को खाने के लिए मछली भी डाली जा सकती है। तालाबों के पास पौधरोपण भी किया जाएगा।
करीब 500 तालाबों की होगी जांच
जिले में अब तक करीब 400 तालाबों को अब तक जांच के लिए चिह्नित कर लिया जाएगा। अभियान के दौरान जिले के करीब 500 तालाबों के पानी की जांच हो सकती है। पानी साफ होगा तो तालाब के किनारे जैव विविधता बढ़ेगी। पक्षियों के झुंड तालाबों में आने शुरू होंगे।
तालाबों का कायाकल्प कराने की योजना
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक पानी की जांच कराई जा रही है। राष्ट्रीय हरित अभीकरण की तालाबों की कायाकल्प करने की योजना है। इसी योजना के अनुसार काम कराया जा रहा है।