फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गन्ने की पैदावार है हल्की, प्रति बीघा सवा तीन हजार रुपये तक का है नुकसान

विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले साल से 15 प्रतिशत कम है गन्ने की पैदावार
विज्ञापन

बिजनौर। पिछले साल सर्दियों में हुई बारिश और गन्ने की बंपर पैदावार ने इस साल किसानों का खेल बिगाड़ दिया है। इस साल गन्ने की पैदावार पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत तक कम निकल रही है। पिछले साल गन्ना पौधा देर से कटने के कारण अगली फसल को वृद्धि के लिए पूरा समय नहीं मिल पाया। पिछले साल के मुकाबले किसान को प्रति बीघा जमीन में सवा तीन हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पिछले साल जिले में करीब सवा दो लाख हेक्टेयर जमीन में गन्ना बोया गया था। गन्ने की बंपर पैदावार के बीच 2019 के पेराई सत्र में गन्ने का औसत उत्पादन 64 क्विंटल प्रति बीघा तक निकला था जो 2020 में बढ़कर 69 क्विंटल प्रति बीघा तक जा पहुंचा। अधिक पैदावार की वजह से मिलों का संचालन देर तक हुआ। पिछले साल बारिश की वजह से जिले 36 दिन तक मिलों में गन्ना पेराई नहीं हो पाई थी या केवल नाम मात्र की पेराई हुई थी। बारिश की वजह से किसान मिलों में गन्ना लेकर नहीं आ सके थे। इस वजह से मिलों का पेराई सत्र और लंबा खिंच गया। अप्रैल में बंद होने वाली मिलों ने जून तक पेराई की। इस वजह से गन्ना पौधा देर से काटा गया। अगले साल पैड़ी को बढ़ने के लिए केवल चार से पांच महीने ही मिले जबकि पैड़ी को वृद्धि के लिए आठ से दस महीने का समय की जरूरत होती है। इसका असर गन्ने की पैदावार पर पड़ रहा है। गन्ने की पैदावार 15 प्रतिशत तक कम निकल रही है यानि औसतन प्रति बीघा दस क्विंटल तक गन्ना कम निकल रहा है। मोहल्ला जाटान निवासी जगवंत सिंह, राजपाल सैनी, बब्लू चौधरी आदि का कहना है कि पैदावार हल्की निकल रही है। पैदावार कम होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

साल गन्ने की पैदावार
2014-15 657.44
2015-16 685.56
2016-17 784.04
2017-18 833.96
2018-19 859.50
2019-20 864
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
पौधा भी है हल्का
पैड़ी ही नहीं पौधे का उत्पादन आठ प्रतिशत तक कम रहने के आसार हैं। जब किसानों ने गन्ना बोया था तब लगातार बीच-बीच में बारिश हो रही थी। इससे गन्ने के जमाव और वृद्धि पर असर पड़ा है। पौधा भी पिछले साल के मुकाबले कमजोर है।
समय से होगा पेराई सत्र पूरा
बिजनौर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक राहुल चौधरी के अनुसार गन्ने की पैदावार दस से 15 प्रतिशत तक कम है। मिल जल्दी चलने की वजह से इस बार पेराई सीजन जल्दी खत्म हो जाएगा।
सरकार करे नुकसान की भरपाई
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि गन्ने की पैदावार कम निकलने की वजह से किसानों को नुकसान हो रहा है। प्रदेश सरकार को इसकी भरपाई करने के लिए गन्ने के दाम कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने चाहिएं।
विज्ञापन

कमजोर है फसल
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार पिछले पेराई सत्र में मिल देर तक चलने व लगातार बारिश से गन्ने की फसल कमजोर है। किसानों को गन्ना पर्ची समय पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें