नजीबाबाद। नई आबकारी नीति में राब और गलावट को शीरा श्रेणी में शामिल किए जाने से क्षेत्र की दो खांडसारी इकाइयों का अस्तित्व खतरे में हैं। एक खांडसारी फरवरी माह में बंद हो चुकी थी, मगर मजदूरों की गुहार पर बुधवार से होली तक के लिए चलाया गया है। दूसरी इकाई भी बंदी की कगार पर हैं। प्रदेश में करीब तीन दर्जन खांडसारी इकाइयां ऐसी है जो राब और गलावट उत्पाद तैयार करती हैं। राब की बिक्री नहीं होने से दोनों उद्यमियों को लाखों का नुकसान है।
नजीबाबाद में वर्ष 1972 में स्थापित शंभूनाथ-बालमुकंद खांडसारी उद्योग और 1977 में स्थापित वीरेंद्र कुमार एंड संस खांडसारी उद्योग राब और गलावट उत्पाद तैयार करते हैं। अन्य इकाइयां चीनी उत्पादन के साथ शीरा उत्पाद तैयार करती हैं। एक नवंवर 2024 से राब, गलावट और सलावट से जुड़ी खांडसारी इकाइयों पर आबकारी नीति के अंतर्गत रैगुलेट्री फीस लागू की गई, जिससे अंतर्गत मंडी एवं जीएसटी देनी वाली खांडसारी इकाइयों पर राब उत्पाद पर 20 रुपये प्रति क्विंटल रेगुलेट्री फीस देनी होगी।
रेगुलेट्री फीस लागू करने की नई आबकारी नीति से क्षेत्र की दोनों खांडसारी इकाइयों सहित प्रदेश की करीब 35 खांडसारी इकाइयों पर बंदी की तलवार लटक रही है। नजीबाबाद की एक खांडसारी इकाई को फरवरी माह में बंद करना पड़ा। करीब 150 मजदूरों में से करीब 60 मजदूर खांडसारी इकाई पर बंदी के बादल छाने के बाद अपने घरों को वापस हो गए। शेष मजदूरों ने खांडसारी इकाइयों पर होली तक इकाई को संचालित करने और उन्हें आर्थिक संकटों से उबारने की गुहार लगाई। शंभूनाथ-बालमुकंद खांडसारी उद्योग के संचालक राजुल रंधर ने बुधवार को पुन: गन्ना खरीद शुरू कराकर होली तक खांडसारी उद्योग को संचालित रखने का फैसला लिया है।
उधर, वीरेंद्र कुमार एंड संस फर्म के राजीव अग्रवाल का कहना है कि राब और गलावट शिरा श्रेणी में शामिल और नई नीति के अनुरूप बिक्री के निर्देश से खंडसारी उद्योग की राब और गलावट की बिक्री ठप है। खांडसारी इकाइयां आर्थिक चुनौतियों के दौर से गुजर रही हैं। इन्हें बंद करना ही एक मात्र विकल्प नजर आ रहा है।
न्यायालय पहुंचे खांडसारी संचालक
गुड़ एवं खांडसारी उत्पादक संघ के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पोर्टल सहित शासन से राब और शीरा को एक श्रेणी शामिल किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। राहत नहीं मिलने पर खांडसारी संचालकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में न्याय के लिए दस्तक दी है। 10 मार्च को मामले में सुनवाई से खांडसारी संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
राब और शीरा के मूल्य में भारी अंतर
खांडसारी उद्योग संचालकों का दावा है तरल राब, गलावट और सलावट शीरे से अलग है। शीरे और इनके मूल्य में भारी अंतर है। मंडी शुल्क, जीएसटी के अंतर्गत नियमानुसार संचालित खांडसारी राब गलावट को आबकारी में शामिल किए जाने से प्रदेश की इकाइयां प्रभावित हैं।
बोले मजदूर
वर्षों से अनेक परिवार खांडसारी इकाई पर सीजनल रहकर पूरे वर्ष परिवार का खर्च चलाते हैं। इकाई बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। फिलहाल उन्हें खांडसारी मालिकों ने रोजगार में बनाए रखने का आश्वासन दिया है।
- निसार अहमद, मजदूर, निवासी बरेली
काफी समय तक इकाई का संचालन ठप रहा। अनेक मजदूर वापस चले गए। इकाई का संचालन पूरी तरह ठप होने से सैकड़ों मजदूर परिवार को आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा।
- मो.शमी, मजदूर, ककराला बदायूं