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गुड़ का दाम कम होने से गन्ने का रेट भी गिरा

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गुड़ के दाम कम होने से गन्ने का रेट भी गिरा
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बिजनौर। गुड़ की कम हुई कीमतों ने किसानों की दीपावली की चमक फीकी कर दी है। गुड़ के दाम कम होने से कोल्हुओं पर गन्ने के दाम भी कम हो गए हैं। कोल्हुओं पर किसानों को गन्ने का नगद दाम तो मिल रहा है, लेकिन दाम से 30 से 40 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आ गई है। दाम घटने से किसान भी परेशान हैं। गुड़ के दाम बढ़ने पर ही किसानों को फायदा होगा। खर्च चलाने को मजबूरी में किसान 115 रुपये प्रति क्विंटल कम मूल्य पर गन्ना बेच रहे हैं।
दो लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन में खड़ी गन्ने की फसल को किसान जिले की नौ चीनी मिलों को बेचते हैं। चीनी मिलों द्वारा 14 दिन के अंदर भुगतान दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन मिलें महीनों बाद तक किसानों का भुगतान लटकाए रहती है। ऐसे में किसानों को कोल्हू व क्रेशरों का सहारा होता है। कोल्हू व क्रेशरों पर गुड़ बनाकर बेचा जाता है। ये किसानों से नगद गन्ना खरीदते हैं। जिले में करीब 600 कोल्हू व 50 से अधिक क्रेशर संचालित होते हैं। इस बार भी जिले में कोल्हू अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में ही चल गए थे। शुरूआत में गुड़ के दाम 3600 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल थे। तब कोल्हुओं पर गन्ना 240 से 260 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर खरीदा गया था, लेकिन बाजार में अब नए गुड़ के दाम घटकर 2900 से तीन हजार हो गए हैं। मुनाफा कम होने पर कोल्हू मालिकों ने भी गन्ने के दामों में कमी कर दी है। गन्ने के दाम 210 से 220 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गए हैं। गन्ने के दाम कम होने से किसानों को भी नुकसान हो रहा है। त्योहारी सीजन में गन्ने के दाम कम होने से किसान भी परेशान है। जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए किसान कोल्हुओं पर गन्ना बेचते हैं, लेकिन गन्ने का दाम भी कम होने से अब किसान भी परेशान हो गए हैं। पिछले साल मिलों में गन्ने का दाम 325 रुपये प्रति क्विंटल था। अब किसान 210 रुपये प्रति क्विंटल पर गन्ना बेचकर 115 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठा रहे हैं।
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ज्यादा माल बनने से कम हुआ मूल्य
जिले भर में 600 से ज्यादा कोल्हू चलते हैं। इनमें से ज्यादातर पर पेराई शुरू हो चुकी है। कोल्हुओं पर किसान अच्छी तादाद में गन्ना भी लेकर आ रहे हैं। गन्ना ज्यादा आने पर माल ज्यादा बनने से गन्ने का दाम गिरा है।
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मिल बंद होने के बाद भी चलते हैं कोल्हू
एक कोल्हू पर दिन भर में करीब 100 क्विंटल गन्ने की पेराई होती है। क्रेशर पर एक दिन में एक हजार क्विंटल तक गन्ने की पेराई हो जाती है। कोल्हू मिलों से पहले चल जाते हैं और मिल बंद होने के बाद तक भी चलते रहते हैं।
गुड़ का मूल्य बढ़ने पर बढ़ेगा गन्ने का भाव
कोल्हू मालिक राकेश सैनी के अनुसार गुड़ के दाम कम होने से गन्ने के दाम कम किए गए हैं। अगर गुड़ के दाम चढ़ेंगे तो गन्ने का मूल्य अपने आप बढ़ जाएगा।
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