बिजनौर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं पढ़ाई शह और मात के खेल शतरंज में विद्यार्थी माहिर बनेंगे। स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शतरंज किट वितरण की गई। गत शनिवार एवं रविवार को चैस एसोसिएशन कार्यालय पर हुई कार्यशाला में कुद विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया। यह पहल छात्रों के मानसिक विकास और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
जनपद में 2119 परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। विद्यालयों में पढ़ाई के साथ छात्र-छात्राओं को खेलों में होशियार किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी के प्रयास से परिषदीय स्कूलों में छात्रों को शतरंज की किट वितरण कराई गई। मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी चरण सिंह ने बताया कि पढ़ाई के साथ शतरंज खेलने से छात्रों में सोचने की क्षमता, ध्यान, स्मृति, तर्क शक्ति और आत्म-मूल्यांकन जैसे संज्ञानात्मक और सामाजिक कौशल विकसित होते हैं, जो उन्हें शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन में सफल होने में मदद करते हैं।
दिया जा रहा प्रशिक्षण
बिजनौर चैस एसोसिएशन के सचिव दुश्यंत कुमार ने इंदिरा बाल भवन स्थित चैस क्लब में शनिवार व रविवार को दो दिवसीय कार्यशाला कराई गई। इसमें ग्रैंड मास्टर हिमांशु शर्मा ने परिषदीय व अन्य स्कूलों के छात्र शतरंज खिलाड़ियों को खेल की बारीकियां सिखाईं। समय समय पर परिषदीय स्कूलों में प्रतियोगिताएं भी कराते रहते हैं।
शिविर का उद्देश्य शतरंज के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को पंख देना, उनके खेल कौशल का विकास करना तथा उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए प्रेरित करना रहा।
पढ़ाई के साथ शतरंज के लाभ
-शतरंज मस्तिष्क के लिए एक व्यायाम की तरह है, जो सोचने की क्षमता, ध्यान, स्मृति और तर्क शक्ति को बढ़ाता है।
-यह खेल छात्रों को दबाव में निर्णय लेने और समस्याओं को हल करने के लिए रणनीतिक सोच विकसित करने में मदद करता है।
-शतरंज आत्म-मूल्यांकन, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम वर्क को प्रोत्साहित करता है। इससे बच्चों को समाज में जरूरी कौशल सीखने में मदद मिलती है।