जिले में बढ़ रहे पथरी के मरीज, हर महीने हो रहे 250 ऑपरेशन
बिजनौर। जिले के लोगों में गुर्दे और पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में करीब 40 प्रतिशत ऑपरेशन पथरी से संबंधित हो रहे हैं। समय से ऑपरेशन नहीं कराने पर गुर्दे में खराबी की समस्या आ रही है। यही स्थिति पित्त की थैली में पथरी की भी है। अकेले जिला अस्पताल में आजकल प्रतिदिन किए जा रहे लगभग 20 अल्ट्रसाउंड में से आठ मरीज तक पथरी की समस्या के निकल रहे हैं। चिकित्सक इसका कारण अनियमित दिनचर्या, गड़बड़ खानपान और शरीर में पानी की कमी के कारण गुर्दे में छोटे-छोटे कण इकट्ठा होने को मान रहे हैं।
पित्त की थैली में पथरी खासकर 20 और 60 साल की उम्र के बीच महिलाओं में पुरुषों की तुलना में होने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा जो लोग मोटापे के शिकार हैं, उनमें पित्त पथरी होने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। जिन लोगों में पित्त संक्रमण (ट्रॉपिक्स में लिवर फ्लूक) होता है, उनमें पित्त पथरी विकसित हो जाता है।
जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन अरुण कुमार पांडेय के अनुसार आहार नियंत्रण करना (तेजी से वजन घटाने के साथ) और कुछ कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं भी पित्त पथरी के खतरे को बढ़ा सकती है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में पित्त पथरी होने की आशंका अधिक रहती है। गर्भावस्था में पथरी का खतरा अधिक होता है। ऐसे में पानी खूब पीना चाहिए।
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट बीआर त्यागी बताते हैं कि रोजारा करीब 20 अल्ट्रासाउंड में से लगभग आठ पथरी की समस्या के मरीज मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को टमाटर, प्याज, बैंगन, पालक आदि पत्तेदार और बीजयुक्त सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए। इसके अलावा फास्ट फूड और मांसाहारी खाद्य और पेय पदार्थों के सेवन से भी पथरी की बीमारी को बढ़ावा देते हैं। ये सभी चीजें पथरी की समस्या को बढ़ाती हैं।
आयुष्मान हॉस्पिटल के मालिक वरिष्ठ सर्जन पीयूष वर्मा बताते हैं कि मरीजों को पथरी से जो गंभीर समस्याएं होती हैं, सामान्यत: उनमें लिवर या अग्न्याशय की जटिलताएं शामिल होती हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां पर रोजाना चार से पांच और हर महीने ऐसे मरीजों की संख्या लगभग 70 से 80 ऑपरेशन गुर्दे और पित्त की थैली में पथरी की समस्या होते हैं।
शक्ति नर्सिंग होम के मालिक राजकुमार का कहना है कि पथरी वाले कुछ रोगियों को उबकाई या उल्टी होती है और कुछ रोगियों को खाने के बाद अक्सर एक गैसीय अनुभव के साथ केवल अपच महसूस होती है। अधिकांश लक्षण तले हुए या वसायुक्त खाने के बाद हालात बदतर हो जाते हैं, लेकिन कभी कभी किसी भी तरह के भोजन से शुरू हो सकते हैं। प्रतिमाह वे गुर्दे और पित्त की थैली के लगभग 40 से 50 ऑपरेशन करते हैं।
ऐसे करें बचाव
1. एक दिन में औसतन तीन लीटर पानी पीएं।
2. टमाटर, प्याज, पालक आदि का सेवन न करें।
3. वसायुक्त यानी चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ न खाएं।
5. फास्ट फूड के सेवन से भी बचें।
6. मांसाहारी खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन न करें।