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Bijnor News: 80 वर्ष की उम्र पूरी कर कार्बेट को अलविदा कह गई सोनाकली हथिनी

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80 वर्ष की उम्र पूरी कर कार्बेट को अलविदा कह गई सोनाकली हथिनी, शोक में डूबा कार्बेट प्रशासन वाल
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कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व के विभिन्न वन क्षेत्रों में वन व वन्यजीव संरक्षण के लिए अपनी सेवाएं देकर 80 वर्ष की आयु में सोनाकली हथिनी अलविदा कह गई। राजकीय सम्मान के साथ ढिकाला के वनों में सोनाकली के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में 23 जनवरी 2018 से सेवानिवृत्त के बाद राजकीय कार्य से मुक्त होकर कार्बेट के ढिकाला में सोनाकली महावत सरफराज खान व चाराकटर वाहिद खान की सेवा में अपना जीवन जी रही थी। शनिवार की रात्रि में सोनाकली ने अंतिम सांस ली और दुनिया को अलविदा कह गई। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने निरीक्षण कर उसे मृत घोषित किया। वन अधिकारियों व कर्मियों ने सोनाकली को राजकीय सम्मान के साथ सलामी देकर अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर कार्बेट टाइगर रिजर्व की उप निदेशक आइएफएस सुश्री पंडित शिरीन संजय, पार्क वार्डन बिन्दर पाल, डॉ. दुष्यंत शर्मा, वनक्षेत्राधिकारी संजय पाण्डे, रमेश चंद्र ध्यानी आदि मौजूद रहे।

कालागढ़ के अलावा कार्बेट के अनेक वनक्षेत्रों में दी सेवाएं
सोनाकली की सेवाएं ढिकाला में 1997 से 2002 तक व उसके बाद 2016 तक कालागढ़ टाइगर रिजर्व के हल्दूपड़ाव व कालागढ़ क्षेत्र में अपने दायित्वों का निर्वाह करती रही। 2016 से कार्बेट के ढिकाला में अपनी सेवाएं दे रही थी। 2018 से वह राजकीय कार्य से मुक्त हो गई थी। उसका उपचार चल रहा था। उसकी सेवा महावत व चाराकटर कर रहे थे।
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आदमखोर बाघ का रेस्क्यू व वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बड़ोला के अनुसार सोनाकली की मृत्यु एक बड़ी क्षति है। 2011 में गर्जिया में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू में शामिल रही। 2012 में दीवान राम की मृत्यु के बाद बाघ के मुंह से उसके शव को खींच लाई। 2023 में सर्पदूली में बाघ रेस्क्यू में उसकी भूमिका किसी से छिपी नहीं है। मानव वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

कालागढ़ की हाथीशाला में याद की जा रही उसकी सेवाएं
कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदरपाल व वनक्षेत्राधिकारी एनके रूवाली के अनुसार कालागढ़ क्षेत्र में दी गई सेवाओं का काल भी कम नहीं रहा है। यहां लोग उसे पहचानते थे। कालागढ़ में सोनाकली न केवल वन क्षेत्र वरन आबादी से भी होकर गुजरती थी। उसकी मस्तानी चाल लोगों को अब भी याद है। रेंज के कर्मी भी दुखी हैं।
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