21 जून को खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा सूर्यग्रहण
बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि 21 जून आषाढ़ अमावस को होने वाला सूर्य ग्रहण पूरे भारत में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक 20 जनवरी की रात 9:16 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। 21 जून को सुबह 9:15 बजे से ग्रहण शुरू हो जाएगा। 10:17 बजे से कंकण प्रारंभ हो जाएगा। दोपहर 12:10 बजे पर परम ग्रास यानि मध्य होगा। दोपहर 02:02 बजे कंकण व 03:04 बजे पर ग्रहण समाप्त होगा।
बिजनौर में सुबह दस बजकर 22 मिनट पर ग्रहण प्रारंभ होगा। रविवार को घटित होने के कारण इस सूर्यग्रहण को चूड़ामणि सूर्यग्रहण कहा गया है। ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप, पूजा का बहुत महत्व है। ग्रहण शुरू होने से पहले ही स्नान, जप, संकल्प कर लेना चाहिए। मध्यकाल में होम, पूजा-पाठ और ग्रहण का मोक्ष समीप होने पर दान व पूर्ण मोक्ष होने पर स्नान करना चाहिए। ग्रहणकाल में सूर्य उपासना, सूर्याष्टक स्तोत्र आदि का जप करना चाहिए। पका हुआ अन्न, कटी हुई सब्जी ग्रहण काल में दूषित हो जाते हैं। उन्हें नहीं खाना चाहिए लेकिन तेल, घी, दूध, मक्खन, पनीर, अचार, चटनी, मुरब्बा आदि में तिल, कुशातृण या तुलसीदल रख देना चाहिए। सूखे खाद्य पदार्थों में तुलसीदल डालने की जरूरत नहीं है।
ग्रस्त सूर्य बिंब को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। सूतक एवं ग्रहणकाल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना पीना, सोना व तेल से मालिश करना वर्जित है। वृद्ध, रोगी, बालक व गर्भवती महिलाओं को यथानुकूल भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्जी काटने, सोने, पापड़ सेकने से परहेज करना चाहिए और किसी भी धर्मग्रंथ का पाठ करते हुए प्रसन्न रहना चाहिए। एक गोला गोद में लेकर बैठना चाहिए और ग्रहण के उपरांत उसे जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। कहा कि ग्रहण पर छह ग्रह वक्री हो रहे हैं। इसका मतलब है ये उल्टी चाल चलेंगे। ग्रहों के वक्री होने से राशियों पर अलग अलग प्रभाव पड़ेगा।